कर्नाटक हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों के परिसर में PM जन औषधि केंद्रों को बंद करने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है
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चर्चा में क्यों
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों के परिसर में PM जन औषधि केंद्रों को बंद करने के राज्य सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस फैसले को पलटना जनहित के लिए हानिकारक है।
पृष्ठभूमि
कर्नाटक हाई कोर्ट ने सभी तालुक सरकारी अस्पतालों में पीएम जन औषधि केंद्रों को बंद करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ फैसला सुनाया है। ये केंद्र 2016 की नीति के आधार पर दवाओं पर 50% से 80% तक की छूट प्रदान करते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- योजनाPM जन औषधि केंद्र 50% से 80% की छूट पर दवाइयां उपलब्ध कराते हैं।
- संस्थाकर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य की पॉलिसी रिवर्सल (policy reversal) को रद्द कर दिया।
- तथ्ययाचिकाकर्ता 2016 की पॉलिसी के आधार पर पांच से सात वर्षों से केंद्रों का संचालन कर रहे थे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोक कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने और मनमाने नीतिगत परिवर्तनों के विरुद्ध हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करने में न्यायिक पुनरावलोकन की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- नीतिगत विसंगति: प्रशासनिक विवेक और सार्वजनिक कल्याण के लिए सरकार की पिछली प्रतिबद्धताओं के बीच टकराव
- सार्वजनिक स्वास्थ्य पहुंच: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की सामर्थ्य पर सब्सिडी वाली दवा की दुकानों को हटाने का प्रभाव
- न्यायिक निगरानी: नीति-निर्माण में कार्यकारी स्वायत्तता और जनहित के सिद्धांत के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · जनहित · नीतिगत निरंतरता · स्वास्थ्य का अधिकार · प्रशासनिक विवेकाधिकार
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।