वित्त मंत्रालय ने कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की लागत और आपूर्ति की कमी को कम करने के लिए 1 जून
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चर्चा में क्यों
वित्त मंत्रालय ने कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की लागत और आपूर्ति की कमी को कम करने के लिए 1 जून, 2026 से पांच महीनों के लिए कपास के आयात पर सभी कस्टम ड्यूटी (Customs Duties) को माफ कर दिया है।
पृष्ठभूमि
यह छूट कपास के आयात पर लगने वाले सभी सीमा शुल्क (Customs Duties) पर लागू होगी। छूट की अवधि पांच महीने की है, जो 1 जून, 2026 से 30 अक्टूबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यकॉटन के आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 1 जून, 2026 से शुरू होने वाले पांच महीनों के लिए वैध है।
- संस्थाइंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) से छूट देने के लिए वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) जिम्मेदार संस्था है।
- तथ्यछूट की अवधि 30 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होगी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की कपड़ा मूल्य श्रृंखला (textile value chain) में कच्चे माल पर आयात शुल्क के उदारीकरण और घरेलू प्राथमिक उत्पादकों के हितों की सुरक्षा के बीच निहित समझौतों (trade-offs) का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- इनपुट लागत में उतार-चढ़ाव: कच्चे माल की ऊंची कीमतें टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में MSMEs की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही हैं
- प्रोड्यूसर-कंज्यूमर कॉन्फ्लिक्ट: उपभोक्ताओं की प्राइस-सेंसिटिविटी और घरेलू कॉटन किसानों की आजीविका के बीच संतुलन
- सप्लाई चेन रेजिलिएंस: रणनीतिक इम्पोर्ट ड्यूटी एडजस्टमेंट के जरिए मौसमी सप्लाई की बाधाओं को दूर करना
मुख्य शब्द: इनपुट लागत · MSMEs · व्यापार उदारीकरण · वैल्यू चेन · सप्लाई की कमी
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।