वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने कहा कि 1972 के वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (Wildlife Protection Act) के लागू होने के बाद वन्यजीवों की आबादी बढ़ने के कारण मानव-पशु संघर्ष में वृद्धि हुई है
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चर्चा में क्यों
वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने कहा कि 1972 के वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (Wildlife Protection Act) के लागू होने के बाद वन्यजीवों की आबादी बढ़ने के कारण मानव-पशु संघर्ष में वृद्धि हुई है।
पृष्ठभूमि
कर्नाटक में बाघों की संख्या 1972 में 12 से बढ़कर वर्तमान में 200 हो गई है। बांदीपुर नेशनल पार्क की अनुमानित वहन क्षमता (carrying capacity) 100-110 बाघों की है, जो वर्तमान में पार हो चुकी है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकWildlife Protection Act, 1972: यह वह कानून है जिसने शिकार पर रोक लगाई और संरक्षित प्रजातियों की आबादी में वृद्धि की।
- तथ्यबांदीपुर नेशनल पार्क: इसकी अनुमानित कैरिंग कैपेसिटी (carrying capacity) 100-110 टाइगर है।
- तथ्यकर्नाटक टाइगर सेंसस: बाघों की संख्या 1972 में 12 से बढ़कर वर्तमान में 200 हो गई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वन्यजीवों की जनसंख्या वृद्धि और संरक्षित क्षेत्रों की वहन क्षमता (carrying capacity) के बीच असंतुलन से उत्पन्न होने वाली पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- पारिस्थितिक असंतुलन: बांदीपुर नेशनल पार्क की जैविक क्षमता से अधिक बाघों की आबादी
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: शिकार पर रोक के बाद आबादी बढ़ने से पैदा हुए क्षेत्रीय विवाद और सुरक्षा जोखिम
- पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षण की सफलता और स्थानीय समुदाय की सुरक्षा व भूमि उपयोग के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: वहन क्षमता · मानव-पशु संघर्ष · वन्यजीव संरक्षण · पारिस्थितिक संतुलन · आबादी की गतिशीलता
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
- आंध्र प्रदेश वन विभाग और सहयोगी संगठन कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य में 40वीं एशियाई जलपक्षी गणना (Asian Waterbird Census) और 60वीं अंतर्राष्ट्रीय जलपक्षी गणना (International Waterbird Census) आयोजित कर रहे हैं · 23 दिसंबर 2025
- Wildlife First ने कर्नाटक वन विभाग से Kudremukh Iron Ore Company Limited (KIOCL) के उस प्रस्ताव को खारिज करने का आग्रह किया है · 23 दिसंबर 2025
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्माण श्रमिकों को खतरनाक वायु प्रदूषण से बचाने में विफल रहने के लिए BMC और MPCB की आलोचना की और पर्यावरण की सुरक्षा के संवैधानिक कर्तव्य पर जोर दिया · 23 दिसंबर 2025
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वन भूमि का उपयोग कृषि सहित गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता · 22 दिसंबर 2025
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने घोषणा की है कि ICFRE अरावली रेंज में खनन क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए जिला-वार रिपोर्ट तैयार करेगा · 22 दिसंबर 2025
- केंद्र ने स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर खनन की अनुमति देने के लिए अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में कोई बदलाव नहीं किया गया है · 21 दिसंबर 2025
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।