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भाग I · स्था. 11.2025 
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जैव विविधता के लिए जोखिमों के कारण असम सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है

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चर्चा में क्यों

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने जैव विविधता के लिए जोखिमों के कारण असम सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें चुनाव ड्यूटी के लिए 1,600 असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स (AFPF) कर्मियों को तैनात करने की बात कही गई थी।

पृष्ठभूमि

NGT ने 1,600 AFPF कर्मियों की तैनाती को रोकने के लिए एहतियाती सिद्धांत (Precautionary Principle) का उपयोग किया। असम में यह पहला मामला है जहाँ चुनाव ड्यूटी के लिए वन कर्मियों को तैनात किया गया था।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थानेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT): भारत में पर्यावरण से जुड़े मामलों के लिए एक विशेष निकाय।
  • तथ्यशुरुआत में असम फॉरेस्ट प्रोटेक्शन फोर्स (AFPF) के 1,600 कर्मियों को तैनाती के लिए आदेश दिया गया था।
  • स्थानअसम: वह राज्य जहाँ चुनाव ड्यूटी के लिए फॉरेस्ट पर्सनेल (forest personnel) की मांग की गई।

मेन्स के लिए

प्रश्न: पर्यावरण न्यायशास्त्र में 'एहतियाती सिद्धांत' (precautionary principle) के महत्व और प्रशासनिक आवश्यकताओं तथा पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • संस्थागत संघर्ष: चुनावी लॉजिस्टिक्स और वन संरक्षण बलों के वैधानिक जनादेश के बीच संतुलन
  • कानूनी सिद्धांत: गैर-पर्यावरणीय गतिविधियों के दौरान अपरिवर्तनीय जैव विविधता हानि को रोकने के लिए प्रीकॉशनरी प्रिंसिपल का अनुप्रयोग

मुख्य शब्द: एहतियाती सिद्धांत · जैव विविधता संरक्षण · वैधानिक जनादेश · पर्यावरण न्यायशास्त्र · प्रशासनिक मांग

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · चर्चित स्थान / मानचित्र

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।