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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है

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चर्चा में क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। इस याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या जांच एजेंसियां ट्रायल की कार्यवाही को अनिश्चित काल तक रोक सकती हैं, जो कि उनके अनुसार जमानत के अधिकार का उल्लंघन है।

पृष्ठभूमि

यह मामला छत्तीसगढ़ में 2019 और 2022 के बीच हुए ₹2,000 करोड़ के शराब घोटाले के आरोपों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तर्क दिया कि यह मामला निष्प्रभावी (infructuous) है क्योंकि याचिकाकर्ता पहले से ही जमानत पर बाहर है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यछत्तीसगढ़ में शराब घोटाला (liquor scam) लगभग ₹2,000 करोड़ की कथित राशि से जुड़ा है।
  • पदचैतन्य बघेल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: जांच एजेंसियों की जांच करने की शक्तियों और त्वरित परीक्षण एवं जमानत के मौलिक अधिकार के बीच संवैधानिक संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • प्रक्रियात्मक बाधा: अनिश्चित जांच अवधि संभावित रूप से समय पर ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन
  • न्यायिक निगरानी: न्यायिक कार्यवाही में देरी रोकने के लिए जांच के चरणों पर स्पष्ट टाइमलाइन की ज़रूरत

मुख्य शब्द: जमानत का अधिकार · न्यायिक समीक्षा · जांच की स्वायत्तता · ड्यू प्रोसेस · निरर्थक मुकदमेबाजी

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · मनी लॉन्ड्रिंग एवं संगठित अपराध

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।