सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण हटाने और प्लास्टिक कचरे को साफ करने में हो रही धीमी प्रगति के संबंध में भारत सरकार और नेशनल मिशन फॉर गंगा अथॉरिटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण हटाने और प्लास्टिक कचरे को साफ करने में हो रही धीमी प्रगति के संबंध में भारत सरकार और नेशनल मिशन फॉर गंगा अथॉरिटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि नेशनल मिशन फॉर गंगा अथॉरिटी ने आखिरी बार 2024 में नदी की स्थिति पर अपडेट प्रदान किया था। कोर्ट ने गंगा से जुड़े सभी राज्यों में फ्लडप्लेन डेमार्केशन (floodplain demarcation) के लिए एक योजना की मांग की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थानेशनल मिशन फॉर गंगा अथॉरिटी (National Mission for Ganga Authority): यह संस्था गंगा नदी की सुरक्षा और पुनरुद्धार (rejuvenation) के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यकोर्ट ने नदी संरक्षण के लिए 2016 के नोटिफिकेशन को लागू करने में प्रगति की कमी पर प्रकाश डाला।
- स्थानगंगा नदी: अवैध निर्माण और प्लास्टिक कचरे के संबंध में कोर्ट के आदेश का विषय।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में नदीय बाढ़ के मैदानों (floodplains) से अवैध अतिक्रमण को हटाने में आने वाली संस्थागत और तार्किक चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी गैप: अवैध ढांचों के खिलाफ 2016 के नोटिफिकेशन का बेअसर कार्यान्वयन
- अंतर-राज्य समन्वय: कई राज्यों के अधिकार क्षेत्र में फ्लडप्लेन सीमांकन की जटिलता
- वेस्ट मैनेजमेंट: मौजूदा पुनरुद्धार मिशनों के बावजूद प्लास्टिक कचरे का लगातार जमा होना
मुख्य शब्द: नदी पुनरुद्धार · फ्लडप्लेन सीमांकन · अतिक्रमण कम करना · संस्थागत जवाबदेही · पर्यावरण शासन
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।