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भाग I · स्था. 11.2025 
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कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक नॉन-मेजर पोर्ट्स आयरन ओर हैंडलिंग पॉलिसी, 2025' को मंजूरी दी है

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चर्चा में क्यों

कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक नॉन-मेजर पोर्ट्स आयरन ओर हैंडलिंग पॉलिसी, 2025' को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत, 2010 में लगाए गए प्रतिबंध और 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, 10 नॉन-मेजर पोर्ट्स (non-major ports) से लौह अयस्क (iron ore) के निर्यात को फिर से शुरू किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

यह नीति कारवार, तडाडी और होन्नवर सहित 10 गैर-प्रमुख बंदरगाहों (non-major ports) को कवर करती है। इसमें ₹13 प्रति टन की आवर्ती प्रदूषण शमन, सुरक्षा और पर्यवेक्षण शुल्क (recurring pollution mitigation, safety, and supervision fee) लागू किया गया है। लंबित अदालती मामलों और लोकायुक्त की रिपोर्ट के कारण, इस नीति को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने (retrospective implementation) पर रोक लगा दी गई है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानकर्नाटक के 10 गैर-प्रमुख (non-major) पोर्ट्स में कार्वर, तडाडी, भटकल, मालपे, ओल्ड मंगलौर, बेलेकेरी, होन्नवर, कुंडापुरा, हंगरकट्टा और पदुबिद्री शामिल हैं।
  • तथ्ययह पॉलिसी प्रति टन ₹13 की आवर्ती प्रदूषण शमन (pollution mitigation), सुरक्षा और पर्यवेक्षण शुल्क (supervision fee) को अनिवार्य करती है।
  • संस्थाकर्नाटक मैरिटाइम बोर्ड वह संस्था है जिसके तहत नॉन-मेजर पोर्ट्स (non-major ports) के माध्यम से आयरन ओर हैंडलिंग की जाएगी।
  • अधिनियम / विधेयक2010 का प्रतिबंध मूल रूप से कर्नाटक पोर्ट्स (लैंडिंग एंड शिपिंग फीस) एक्ट, 1961 के तहत लागू किया गया था।

मेन्स के लिए

प्रश्न: खनन क्षेत्र में औद्योगिक निर्यात वृद्धि, पर्यावरणीय सुरक्षा और विनियामक निरीक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: सख्त लाइसेंसिंग और वार्फ़ेज चार्ज के जरिए ऐतिहासिक अवैधताओं और ज़ब्त किए गए खनिज की कमी को दूर करना
  • पर्यावरणीय जवाबदेही: पर्यावरणीय लागत को शामिल करने के लिए प्रति टन प्रदूषण कम करने का शुल्क लागू करना
  • कानूनी-प्रशासनिक टकराव: लंबित लोकयुक्त रिपोर्टों के बीच 2010 के प्रतिबंध से 2025 की नीति तक के बदलाव का प्रबंधन

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · राजस्व सृजन · पर्यावरण सुधार · संसाधन शासन · नीति कार्यान्वयन

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · प्राकृतिक संसाधनों का वितरण

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।