नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंगा नदी बेसिन में अवैध रेत खनन को रोकने के आदेशों का पालन न करने पर भूविज्ञान और खनन निदेशक और UPPCB के सदस्य सचिव को चेतावनी दी है
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चर्चा में क्यों
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंगा नदी बेसिन में अवैध रेत खनन को रोकने के आदेशों का पालन न करने पर भूविज्ञान और खनन निदेशक और UPPCB के सदस्य सचिव को चेतावनी दी है।
पृष्ठभूमि
NGT ने भूविज्ञान और खनन निदेशक, उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के सदस्य सचिव को चेतावनी जारी की है। ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों को खनन स्थलों का नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया है और भविष्य में नियमों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई (Prosecution) की चेतावनी दी है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानगंगा नदी बेसिन: वह विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र जहाँ अवैध रेत खनन की रिपोर्ट दी गई थी।
- पदडायरेक्टर ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग: खनिजों की निगरानी के लिए जिम्मेदार राज्य-स्तरीय प्राधिकरण।
- संस्थाUPPCB: उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttar Pradesh Pollution Control Board) पर्यावरण विनियमन के लिए राज्य की संस्था है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नदी घाटियों में अवैध खनन पर अंकुश लगाने में आने वाली संस्थागत चुनौतियों और पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी ओवरसाइट: माइनिंग और पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड्स के बीच रियल-टाइम मॉनिटरिंग और तालमेल की कमी
- एन्फोर्समेंट गैप: न्यायिक निर्देशों के प्रशासनिक उल्लंघन पर कमजोर दंड के परिणाम
- पारिस्थितिक प्रभाव: अनियंत्रित रेत खनन से नदी पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण और भूजल की कमी
मुख्य शब्द: पर्यावरण न्यायशास्त्र · रेगुलेटरी कंप्लायंस · पारिस्थितिक गिरावट · प्रशासनिक जवाबदेही · न्यायिक सक्रियता
शासन पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।