केरल हाई कोर्ट ने जुलाई 2024 में हुई भूस्खलन की घटनाओं के बाद वायनाड के 'नो गो ज़ोन' (No Go Zones) में स्थित भूमि मालिकों के लिए मुआवजे की मांग करने वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार के रुख को जानने की मांग की है
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चर्चा में क्यों
केरल हाई कोर्ट ने जुलाई 2024 में हुई भूस्खलन की घटनाओं के बाद वायनाड के 'नो गो ज़ोन' (No Go Zones) में स्थित भूमि मालिकों के लिए मुआवजे की मांग करने वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार के रुख को जानने की मांग की है।
पृष्ठभूमि
केरल सरकार ने जुलाई 2024 के बाद वायनाड के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भूमि का अधिग्रहण कर लिया है और उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। याचिकाकर्ता 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के तहत मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकराइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013।
- स्थानवायनड, केरल।
- तथ्यजुलाई 2024 में लैंडस्लाइड्स (Landslides) की घटनाएं हुईं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं के पश्चात पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील 'नो-गो ज़ोन' (No Go Zones) में भूमि स्वामियों को मुआवजा प्रदान करने से जुड़ी कानूनी और नैतिक जटिलताओं का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कानूनी विवाद: 2013 एक्ट के तहत निजी संपत्ति के अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा व पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन
- प्रशासनिक बाधा: प्राकृतिक आपदाओं से हुई ज़मीन के नुकसान बनाम राज्य-निर्धारित पाबंदियों के लिए लायबिलिटी और मुआवजे के ढांचे का निर्धारण
मुख्य शब्द: उचित मुआवजे का अधिकार · नो गो ज़ोन · भूमि अधिग्रहण · आपदा प्रबंधन · पारिस्थितिक संरक्षण
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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