एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह CRZ-III नो डेवलपमेंट ज़ोन में पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने के लिए मनोर में स्थित इंटरनेशनल डुगोंग कंजर्वेशन सेंटर को फिर से डिजाइन करे
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चर्चा में क्यों
एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह CRZ-III नो डेवलपमेंट ज़ोन में पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने के लिए मनोर में स्थित इंटरनेशनल डुगोंग कंजर्वेशन सेंटर को फिर से डिजाइन करे।
पृष्ठभूमि
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की EAC (Expert Appraisal Committee) ने 22,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली एक परियोजना के लिए पारंपरिक सीमेंट और कंक्रीट के उपयोग पर चिंता जताई है। समिति ने तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Coastal Ecosystem) की सुरक्षा के लिए लकड़ी आधारित, प्री-फैब्रिकेटेड (Prefabricated) या कंपोजिट सामग्रियों के उपयोग की सिफारिश की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानमनोरा तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित है।
- तथ्यप्रस्तावित प्रोजेक्ट लगभग 22,000 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में फैला है।
- पर्यावरणप्रस्तावित International Dugong Conservation Centre के लिए Dugong एक टारगेट स्पीशीज (target species) है।
- संस्थाएक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है।
- तथ्यप्रोजेक्ट साइट CRZ-III के नो डेवलपमेंट ज़ोन (No Development Zone) के अंतर्गत आती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बुनियादी ढांचा विकास और तटीय संरक्षण के मध्य उत्पन्न होने वाले द्वंद्व की चर्चा कीजिए। प्रकृति-संवेदनशील डिजाइन (nature-sensitive design) संरक्षण परियोजनाओं के पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रेगुलेटरी फ्रिक्शन: इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतों और सख्त CRZ-III नो डेवलपमेंट ज़ोन प्रतिबंधों के बीच संतुलन
- मटेरियल ट्रांजिशन: कार्बन-इंटेंसिव कंक्रीट से टिम्बर-आधारित या प्रीफैब्रिकेटेड सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन की ओर बदलाव
- पारिस्थितिक अखंडता: समुद्री स्तनधारियों के संरक्षण के लिए तटीय क्षेत्रों में आवास विखंडन को कम करना
मुख्य शब्द: CRZ-III · पारिस्थितिक संवेदनशीलता · सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन · कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट · जैव विविधता संरक्षण
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।