तमिलनाडु रैप्टर रिसर्च फाउंडेशन और AIWC तमिलनाडु में 65 से अधिक प्रजातियों के लिए खतरों और वितरण पैटर्न (distribution patterns) की पहचान करने हेतु राज्यव्यापी पहला रैप्टर असेसमेंट (raptor assessment) आयोजित कर रहे हैं
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चर्चा में क्यों
तमिलनाडु रैप्टर रिसर्च फाउंडेशन और AIWC तमिलनाडु में 65 से अधिक प्रजातियों के लिए खतरों और वितरण पैटर्न (distribution patterns) की पहचान करने हेतु राज्यव्यापी पहला रैप्टर असेसमेंट (raptor assessment) आयोजित कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
यह आकलन 31 जनवरी से 1 फरवरी, 2026 तक निर्धारित है, जिसमें 50 से अधिक वन प्रभागों (forest divisions) को शामिल किया जाएगा। इसका लक्ष्य वनों, पहाड़ियों, आर्द्रभूमि (wetlands) और डंप यार्ड जैसे पारिस्थितिक तंत्रों में रहने वाले दिन और रात में सक्रिय होने वाले दोनों प्रकार के रैप्टर्स (raptors) को कवर करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पर्यावरणयह असेसमेंट तमिलनाडु में 65 से अधिक रैप्टर (raptor) प्रजातियों को कवर करता है।
- तथ्ययह सर्वे विभिन्न इकोसिस्टम्स (ecosystems) में फैले 50 से अधिक फॉरेस्ट डिवीजन्स (forest divisions) को कवर करता है।
- संस्थातमिलनाडु वन विभाग, एडवांस्ड इंस्टीट्यूट फॉर वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन (Advanced Institute for Wildlife Conservation - AIWC) के साथ सहयोग कर रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: खंडित परिदृश्यों में रैप्टर्स (शिकारी पक्षियों) के लिए प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ तैयार करने में प्रजाति-विशिष्ट जैव विविधता आकलन के महत्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डेटा-आधारित संरक्षण: डंप यार्ड में आवास की हानि और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे विशिष्ट खतरों की पहचान
- इकोसिस्टम कनेक्टिविटी: पहाड़ी इलाकों से तटीय क्षेत्रों तक विविध आवासों में रैप्टर वितरण का आकलन
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · रैप्टर असेसमेंट · आवास विखंडन · प्रजातियों का वितरण · वन्यजीव प्रबंधन
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।