अंतरिक्ष में लगाए जाएंगे विशाल मिरर, अमेरिकन स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल का प्लान
GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· अंतरिक्ष तकनीक (ISRO, मिशन)· प्रीलिम्स·
चर्चा में क्यों
अमेरिकी स्पेस स्टार्टअप Reflect Orbital ने पृथ्वी पर सूरज की रोशनी को निर्देशित करने के लिए ऑर्बिटल मिरर्स (orbital mirrors) तैनात करने की योजना बनाई है, जिससे प्रकाश प्रदूषण और पारिस्थितिक प्रभाव (ecological impact) को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
पृष्ठभूमि
रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल (Reflect Orbital) ने विक्रम-1 और विक्रम-1U रॉकेट का उपयोग करते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के साथ दो लॉन्च बुक किए हैं। फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने इस परियोजना के लिए एक डिमॉन्स्ट्रेटर को लाइसेंस दिया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकReflect Orbital: एक अमेरिकन स्पेस स्टार्ट-अप जो ऑर्बिट में विशाल दर्पण (mirrors) रखने की योजना बना रहा है।
- विज्ञान-तकनीकविक्रम-1 और विक्रम-1U: ऑर्बिटल लॉन्च के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित रॉकेट।
- संस्थाFederal Communications Commission (FCC): वह US संस्था जिसने ऑर्बिटल मिरर डिमॉन्स्ट्रेटर (orbital mirror demonstrator) को लाइसेंस दिया।
- तथ्यइस प्रोजेक्ट का उद्देश्य परावर्तित सूर्य के प्रकाश (reflected sunlight) को जमीन के विशिष्ट स्थानों पर निर्देशित करना है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कक्षीय दर्पणों (orbital mirrors) की तैनाती के संभावित पर्यावरणीय और खगोलीय निहितार्थों पर विचार करते हुए, अंतरिक्ष मलबे और प्रकाश प्रदूषण के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय नियमों की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- पारिस्थितिक व्यवधान: कृत्रिम रोशनी से रात के वन्यजीवों और प्रवासी पैटर्न के बाधित होने की संभावना
- खगोलीय हस्तक्षेप: ऑर्बिटल मिरर्स के पूर्णिमा से भी अधिक चमकने और ज़मीनी अवलोकनों में बाधा डालने का जोखिम
- रेगुलेटरी वैक्यूम: ऑर्बिटल लाइट पोल्यूशन और स्पेस-बेस्ड सोलर रिडायरेक्शन को नियंत्रित करने वाले व्यापक अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क की कमी
मुख्य शब्द: ऑर्बिटल मिरर्स · अंतरिक्ष का कचरा · लाइट पोल्यूशन · स्पेस गवर्नेंस · स्काईरूट एयरोस्पेस
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
- अब सस्ते में मिलेंगे इंडक्शन कुकटॉप, EESL ने ₹6,990 में ऑफर दिया · 6 नवंबर 2026
- NCR में प्रदूषण बढ़ा, AIIMS में सांस की बीमारियां 20 फीसदी तक बढ़ीं · 6 नवंबर 2026
- बांदीपुर में AI तकनीक से होंगे 190 टाइगर और 1,200 हाथी मॉनिटर · 6 नवंबर 2026
- स्टारलिंक ने जमा किए सिक्योरिटी डॉक्यूमेंट्स, भारत में शुरू होगी सैटेलाइट सर्विस · 6 नवंबर 2026
- कर्नाटक में 5,000 सरकारी स्कूल टीचरों को मिलेगा AI का ट्रेनिंग · 6 नवंबर 2026
- 2030 तक स्पेस को कचरे से मुक्त बनाएगा भारत, 'स्वच्छ स्पेस' विजन लॉन्च · 6 नवंबर 2026
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।