Cosmoserve Space ने हैदराबाद में खोला बेस 1, सैटेलाइट सर्विसिंग का खर्च कम होगा
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चर्चा में क्यों
कॉसमोसर्व स्पेस (Cosmoserve Space) ने हैदराबाद में 'बेस 1' (Base 1) का अनावरण किया है। यह अंतरिक्ष-दृष्टि प्रणालियों (space-vision systems) और सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण सिमुलेशन (microgravity simulation) से लैस भारत की पहली निजी सुविधा है, जो सैटेलाइट मरम्मत और रिफ्यूलिंग सेवाएं प्रदान करेगी।
पृष्ठभूमि
कॉसमोसर्व स्पेस (Cosmoserve Space) ने हैदराबाद में 'बेस 1' लॉन्च किया है, जिसमें स्पेस-विज़न सिस्टम और माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन (microgravity simulation) की सुविधा उपलब्ध है। इस स्टार्टअप का लक्ष्य प्रति सैटेलाइट सैटेलाइट सर्विसिंग की लागत को 10 मिलियन डॉलर से घटाकर 1 मिलियन डॉलर से कम करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकभारत की पहली प्राइवेट फैसिलिटी (Private facility) जो स्पेस-विज़न सिस्टम्स और माइक्रो-ग्रेविटी सिमुलेशन क्षमताओं से लैस है।
- तथ्यCosmoserve Space का लक्ष्य सैटेलाइट सर्विसिंग की लागत को $10 मिलियन से घटाकर प्रति सैटेलाइट $1 मिलियन से कम करना है।
- स्थानहैदराबाद: Cosmoserve Space की 'Base 1' फैसिलिटी (facility) का स्थान।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और उपग्रह सेवा (सैटेलाइट सर्विसिंग) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के महत्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- लागत-दक्षता: प्रोप्रायटरी स्पेस-विजन टेक्नोलॉजी के जरिए सर्विसिंग लागत को 1 मिलियन डॉलर से कम करना
- ऑर्बिटल सस्टेनेबिलिटी: एक्टिव सैटेलाइट रिपेयर और रिफ्यूलिंग के जरिए स्पेस डेब्रिस के बढ़ते खतरे से निपटना
- प्राइवेट-लेड इनोवेशन: स्टेट-लेड स्पेस एक्सप्लोरेशन से प्राइवेट-सेक्टर-ड्रिवन ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: स्पेस डेब्रिस · ऑर्बिटल सस्टेनेबिलिटी · स्पेस इकोनॉमी · माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन · सैटेलाइट सर्विसिंग
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।