गृह ज्योति स्कीम पर खर्च हुए 9,625 करोड़ रुपये, अब घर-घर होगी जांच
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चर्चा में क्यों
कर्नाटक राज्य सरकार 'गृह ज्योति' मुफ्त बिजली योजना से अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए घर-घर जाकर सर्वे कर रही है।
पृष्ठभूमि
अगस्त 2023 से बेंगलुरु में 38,91,445 परिवारों के लिए गृह ज्योति योजना पर राज्य सरकार ने ₹9,625 करोड़ खर्च किए हैं। यह शहर में पांच गारंटी योजनाओं पर खर्च की गई कुल ₹20,632.77 करोड़ की राशि का 46.65% है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यबेंगलुरु में गृह ज्योति योजना (Gruha Jyothi scheme) पर खर्च: ₹9,625 करोड़।
- तथ्यबेंगलुरु में गृह लक्ष्मी योजना पर खर्च: ₹5,309.52 करोड़।
- तथ्यबेंगलुरु में शक्ति (Shakti) स्कीम पर खर्च: ₹3,963.61 करोड़।
- तथ्यबेंगलुरु में अन्ना भाग्य (Anna Bhagya) योजना पर खर्च: ₹1,672.14 करोड़।
- तथ्यबेंगलुरु में युवा निधि (Yuva Nidhi) स्कीम पर खर्च: ₹62.50 करोड़।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी स्थानीय निकायों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और सब्सिडी योजनाओं की अखंडता सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- लीकेज रोकना: मजबूत रियल-टाइम वेरिफिकेशन के बिना 'फर्जी' लाभार्थियों की पहचान करना मुश्किल
- राजकोषीय दबाव: मुफ्त बिजली और परिवहन पर भारी खर्च से नगर पालिकाओं के राजकोषीय स्पेस पर असर
- प्रशासनिक ओवरहेड: बड़े पैमाने पर शहरी आबादी के लिए घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने की संसाधन-गहन प्रकृति
मुख्य शब्द: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर · राजकोषीय रिसाव · समाज कल्याण योजनाएं · लाभार्थी सत्यापन · अर्बन गवर्नेंस
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।