बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से लड़ने के लिए दो नई इबोला वैक्सीन के ट्रायल को विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंजूरी
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चर्चा में क्यों
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में बंडिबुग्यो स्ट्रेन से लड़ने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए दो नए इबोला टीकों के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है।
पृष्ठभूमि
बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन की मृत्यु दर 50 प्रतिशत है। इसके कारण DRC में 5,300 से अधिक मौतें और 10,444 पुष्ट मामले सामने आए हैं। इन टीकों को यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मॉडर्ना (Moderna) के बीच सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकबुंडीबुग्यो स्ट्रेन (Bundibugyo strain): एक इबोला वायरस स्ट्रेन जिसमें 50% की फैटालिटी रेट (fatality rate) होती है।
- तथ्यDRC ने नवंबर 2026 तक बंडिबुग्यो (Bundibugyo) वायरस के 10,444 पुष्ट मामले दर्ज किए।
- संस्थासीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India): नए इबोला (Ebola) वैक्सीन के प्राथमिक डेवलपर्स में से एक।
- स्थानडेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC): इसके इतिहास में सबसे बड़े इबोला आउटब्रेक (Ebola outbreak) का मुख्य केंद्र।
- विज्ञान-तकनीकErvebo वैक्सीन: इसे ज़ायर (Zaire) स्ट्रेन के लिए अप्रूव किया गया है, लेकिन इसे बुंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: इबोला बुंडीबुग्यो (Ebola Bundibugyo) जैसे उभरते संक्रामक रोगों के लिए स्ट्रेन-विशिष्ट (strain-specific) टीके विकसित करने में सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- R&D कोलैबोरेशन: शैक्षणिक संस्थानों (ऑक्सफोर्ड) और प्राइवेट फर्म्स (मोडेर्ना) के बीच तालमेल
- एपिडेमियोलॉजिकल सर्विलांस: स्ट्रेन-स्पेसिफिक थेरेप्यूटिक्स की कमी और पारदर्शी रिपोर्टिंग की ज़रूरत के कारण हाई-फैटालिटी स्ट्रेन को रोकने में चुनौतियां
मुख्य शब्द: संक्रामक बीमारियाँ · वैक्सीन विकास · बायोटेक्नोलॉजी · ग्लोबल हेल्थ गवर्नेंस · पैथोजन सर्विलांस
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।