एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे
GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI· प्रीलिम्स·
चर्चा में क्यों
RBI/सरकार ने 1 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होने वाले नए फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (Foreign Exchange Management) नियमों की घोषणा की है। इन नियमों के तहत छोटे स्तर के सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और हाई-वैल्यू इम्पोर्ट्स के लिए IDPMS एंट्री को अनिवार्य कर दिया गया है।
पृष्ठभूमि
नए नियम वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात और आयात पर लागू होते हैं। सेवाओं का निर्यात करने वाले निवासी व्यक्तियों के लिए यह माना जाएगा कि उन्होंने एक अधिकृत डीलर बैंक को जानकारी प्रदान करके एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म (Export Declaration Form) जमा कर दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले आयात के लिए आयातकों को इंपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (IDPMS) का उपयोग करना अनिवार्य है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यसेवाओं को एक्सपोर्ट (Export) करने वाले निवासी व्यक्तियों के लिए, एक ऑथोराइज्ड डीलर (Authorised Dealer) बैंक को जानकारी प्रदान करने पर एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म (Export Declaration Form) जमा करना पूर्ण माना जाता है।
- तथ्यअन्य निर्यातकों के लिए सरल घोषणा (simplified declaration) के लिए पात्र होने हेतु ₹10 लाख की सीमा इनवर्ड रेमिटेंस (inward remittances) पर लागू होती है।
- तथ्य₹10 लाख से अधिक मूल्य वाले आयातकों के लिए IDPMS (Import Data Processing and Monitoring System) अनिवार्य है।
- तथ्यForeign Exchange Management फ्रेमवर्क के तहत नए रेगुलेशंस 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्यात-आयात नियामक ढाँचों को सरल बनाने से भारत के 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार करने में सुगमता) को कैसे बढ़ावा मिल सकता है और राष्ट्रीय निर्यात टोकरी में सेवाओं के हिस्से को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- अनुपालन का बोझ: छोटे पैमाने के सर्विस एक्सपोर्टर्स के लिए प्रशासनिक बाधाएं कम करना ताकि लिक्विडिटी में सुधार हो
- डेटा इंटीग्रिटी: अनिवार्य IDPMS इंटीग्रेशन के जरिए हाई-वैल्यू इम्पोर्ट्स की निगरानी को मजबूत करना
- रेगुलेटरी क्लैरिटी: फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट को आसान बनाने के लिए रिपोर्टिंग की शर्तों को स्टैंडर्डाइज करना
मुख्य शब्द: ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस · विदेशी मुद्रा प्रबंधन · व्यापार सुगमता · सेवा निर्यात · रेगुलेटरी कंप्लायंस
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
- कर्नाटक ने सेंटर से मांगा 1,814.85 करोड़ का अतिरिक्त सूखा राहत फंड · 4 नवंबर 2026
- तमिलनाडु में नए सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए 10% BESS क्षमता अनिवार्य · 4 नवंबर 2026
- तमिलनाडु में बनेंगे 134 नए पोलिंग स्टेशन, वोटरों को मिलेगी सुविधा · 3 नवंबर 2026
- लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने से सरकार को 50,000 करोड़ का नुकसान · 3 नवंबर 2026
- नई दिल्ली-नॉर्थईस्ट बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में गुवाहाटी शामिल, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया स्वागत · 3 नवंबर 2026
- आंध्र प्रदेश में बनेंगे 2 स्पेस सिटी, स्पेस पॉलिसी 4.0 के तहत तैयारी · 3 नवंबर 2026
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।