नागपट्टिनम में मिले 12वीं सदी के चोल काल के नटराज और शिवगामी की मूर्तियां
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चोल कांस्य प्रतिमा विज्ञान (Iconography) और पुरातात्विक साक्ष्य: GS1 इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण विषय।
चर्चा में क्यों
तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने नागपट्टिनम में 12वीं शताब्दी के चोल काल की नटराज और शिवगामी की कांस्य मिश्र धातु से बनी मूर्तियाँ खोजी हैं।
पृष्ठभूमि
TNSDA ने एक मीटर की गहराई पर 'आनंद तांडव' मुद्रा में 110 सेमी ऊंची नटराज की और 'त्रिभंग' मुद्रा में 82 सेमी ऊंची शिवगामी की मूर्ति की खोज की है। 12वीं शताब्दी ईस्वी की ये मूर्तियाँ नागपट्टिनम में अपने संबंधित आधारों (pedestals) के साथ मिली हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थाननागापट्टिनम: चोल काल की ब्रॉन्ज अलॉय (bronze alloy) मूर्तियों के उत्खनन का स्थल।
- तथ्यनटराज मूर्ति: 110 cm ऊंचाई और 100 cm चौड़ाई।
- तथ्यशिवगामी मूर्ति: 82 cm ऊंचाई और 23 cm चौड़ाई।
- विज्ञान-तकनीकआनंद तांडव: नटराज मूर्ति की मुद्रा (Posture)।
- विज्ञान-तकनीकत्रिभंग: शिवगामी मूर्ति की मुद्रा।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
नागापट्टिनम में खुदाई में मिली चोल काल की कांस्य मूर्तियों (bronze idols) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सिवागामी की मूर्ति त्रिभंग मुद्रा (Tribhanga posture) में पाई गई थी।
- नटराज की मूर्ति को आनंद तांडव मुद्रा में पाया गया था।
- ये मूर्तियाँ 15वीं शताब्दी AD की हैं।
- (a)केवल 2
- (b)केवल 3
- (c)केवल 1 और 2
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (c) केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है: ये मूर्तियाँ 12वीं शताब्दी AD की हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दक्षिण भारतीय प्रतिमा विज्ञान और धार्मिक प्रथाओं के विकास को समझने में चोल कालीन कांस्य मूर्तिकला के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रतिमात्मक विकास: चोल धातु शिल्प में अनुष्ठानिक प्रतीकों से परिष्कृत सौंदर्य अनुपात तक का बदलाव
- ऐतिहासिक निरंतरता: धार्मिक कला और समुद्री व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में नागपट्टिनम के पुरातात्विक प्रमाण
मुख्य शब्द: चोल राजवंश · प्रतिमा विज्ञान · कांस्य ढलाई · पुरातात्विक साक्ष्य · नागापट्टिनम
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।