नेपाल के PM ने भारत और चीन को साथ लाने के लिए दिया प्रस्ताव
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सीमा पार जलवायु सहयोग और हाइड्रो-पॉलिटिक्स (Hydro-politics): GS2 अंतर्राष्ट्रीय संबंध और GS3 भूगोल के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म' (Himalayan Climate Resilience Mechanism) का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य जलवायु आपदाओं के संबंध में भारत और चीन के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
इस प्रस्ताव का उद्देश्य पिघलते ग्लेशियर्स (glaciers) की समस्या का समाधान करना है, जिनकी पिघलने की दर वर्ष 2000 से दोगुनी हो गई है। इस पहल के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें 3,500 किलोमीटर की विवादित सीमा और ब्रह्मपुत्र एवं सतलज नदियों पर डेटा साझा करने के समझौतों की समाप्ति शामिल है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानहिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म (Himalayan Climate Resilience Mechanism): नेपाल द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) में प्रस्तावित।
- तथ्यहिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने की दर 2000 के बाद से दोगुनी हो गई है।
- तथ्यभारत और चीन के बीच विवादित सीमा 3,500 किलोमीटर लंबी है।
- संस्थाICIMOD, IIT Mandi, और International Crisis Group: हिमालयी जलवायु सहयोग (Himalayan climate cooperation) पर विश्लेषण प्रदान करने वाली संस्थाएं।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म (Himalayan Climate Resilience Mechanism) के संदर्भ में भारत और चीन के बीच विवादित सीमा की लंबाई कितनी है?
- (a)5,000 किमी
- (b)2,200 किमी
- (c)1,500 किमी
- (d)3,500 किमी
उत्तर देखें
उत्तर: (d) 3,500 किमी — नोट में उल्लेख है कि इस पहल को भारत और चीन के बीच 3,500 किमी की विवादित सीमा (disputed frontier) सहित कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्र में सीमा पार जलवायु सहयोग किस प्रकार भारत और चीन के बीच संघर्ष समाधान के एक उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- भू-राजनीतिक तनाव: 3,500 किमी की विवादित सीमा और क्षेत्रीय संवेदनशीलता के साथ जलवायु सहयोग में संतुलन
- डेटा एसिमेट्री: ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों पर डेटा-शेयरिंग समझौतों के खत्म होने का आपदा तैयारी पर असर
- पारिस्थितिक आपात: क्षेत्रीय एकीकरण के लिए 2000 से ग्लेशियर पिघलने की तेज़ दर को संबोधित करना
मुख्य शब्द: सीमा पार सहयोग · क्लाइमेट रेजिलिएंस · जल-राजनीति · ग्लेशियर का पीछे हटना · क्षेत्रीय स्थिरता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।