दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश के सुदूर पहाड़ों में स्लैंडर-आर्म्ड फ्रॉग (slender-armed frogs) की दो नई प्रजातियों की पहचान की है
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चर्चा में क्यों
दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश के सुदूर पहाड़ों में स्लैंडर-आर्म्ड फ्रॉग (slender-armed frogs) की दो नई प्रजातियों की पहचान की है।
पृष्ठभूमि
इस खोज को पीयर-रिव्यूड्ड जर्नल PeerJ में प्रकाशित किया गया है। दो नई प्रजातियों की पहचान की गई है, जिन्हें सोमन स्लैंडर आर्म फ्रॉग (Soman’s Slender Arm Frog) और मेचुका स्लैंडर आर्म फ्रॉग (Mechuka Slender Arm Frog) नाम दिया गया है। इनमें से मेचुका स्लैंडर आर्म फ्रॉग मेचुका कस्बे के पास पाया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पर्यावरणसोमनस स्लैंडर आर्म फ्रॉग (Soman’s Slender Arm Frog): इसका नाम दिवंगत पत्रकार ई. सोमनाथ के नाम पर रखा गया है।
- पर्यावरणमेचुका स्लेन्डर आर्म फ्रॉग (Mechuka Slender Arm Frog): इसकी विशेषता लाल-भूरे रंग का शरीर और चांदी जैसे सफेद रंग की आँखें हैं।
- स्थानमेचुका: अरुणाचल प्रदेश में वह स्थान जहाँ मेचुका स्लेन्डर आर्म फ्रॉग (Mechuka Slender Arm Frog) की खोज की गई थी।
- तथ्ययह अध्ययन नदी प्रणालियों (river systems) को उभयचरों (amphibians) के वितरण पैटर्न को आकार देने वाले प्रमुख कारकों के रूप में रेखांकित करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हिमालयी क्षेत्र में नदीय पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण उभयचर जैव विविधता को बनाए रखने और पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण है, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- हैबिटेट फ्रैगमेंटेशन: इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का रिवरिन कॉरिडोर पर प्रभाव
- एंडेमिज्म जोखिम: जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ों की खास प्रजातियों पर खतरा
- संरक्षण नीति: नए पहचाने गए माउंटेन एम्फीबियंस के लिए साइट-स्पेसिफिक सुरक्षा की ज़रूरत
मुख्य शब्द: जैव विविधता संरक्षण · स्थानिकता · एम्फीबियन का वितरण · नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र · हर्पेटोलॉजी
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।