केरल के अस्पतालों में दवाओं की किल्लत, KMSCL पर 2,200 करोड़ से ज़्यादा का बकाया
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स्वास्थ्य सेवा में सार्वजनिक खरीद और सप्लाई चेन (Supply Chain) की मजबूती: GS2 सामाजिक न्याय और GS3 बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का एक केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMSCL) द्वारा फार्मास्युटिकल कंपनियों के बकाया ₹2,200 करोड़ के कर्ज के कारण केरल के अस्पतालों में गैर-संचारी रोगों (Non-communicable diseases) की दवाओं की कमी हो रही है।
पृष्ठभूमि
KMSCL जून महीने में आपूर्ति जारी करने में विफल रहा और इस वर्ष केवल पहली तिमाही की आपूर्ति जारी की। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने दिसंबर तक खरीद पूरी करने का आदेश दिया है। उन्होंने बिचौलियों को हटाने और सीधे आयातकों को टेंडरों में भाग लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यKMSCL पर फार्मास्युटिकल कंपनियों का ₹2,200 करोड़ से अधिक का बकाया है।
- तथ्यMetformin, telmasartan और atorvastatin सहित नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (non-communicable disease) की दवाओं की कमी की रिपोर्ट दी गई है।
- पदके. मुरलीधरन केरल के हेल्थ मिनिस्टर हैं।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
केरल में दवाओं की कमी (drug shortage) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसकी कमी मुख्य रूप से संक्रामक रोगों (infectious diseases) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को प्रभावित करती है।
- केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KMSCL) पर फार्मास्युटिकल कंपनियों का ₹2,200 करोड़ से अधिक का बकाया है।
- स्वास्थ्य मंत्री ने डायरेक्ट इंपोर्टर्स (direct importers) को टेंडर्स में भाग लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है।
- (a)केवल 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (c) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: यह कमी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (non-communicable disease) दवाओं को प्रभावित करती है।
मेन्स के लिए
Q. आवश्यक दवाओं की सार्वजनिक खरीद में विद्यमान प्रणालीगत चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और राज्य संचालित स्वास्थ्य प्रणालियों में आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Procurement bottleneck: Debt accumulation and delayed payments to private pharma firms disrupting public health supply chains
- Regulatory reform: Potential for direct importer participation to bypass middlemen and reduce costs
- Logistical failure: Impact of delayed quarterly releases on the availability of chronic disease medications
कीवर्ड: Public Procurement · Supply Chain Resilience · Non-communicable Diseases · Fiscal Deficit · Healthcare Infrastructure
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।