विदेशी फंड पर नए नियमों पर AIFs ने SEBI और RBI से की अपील
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नियामक ढांचा और FDI प्रतिबंध: पूंजी बाजार तरलता पर एक GS3 केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) ने SEBI, RBI और वित्त मंत्रालय के समक्ष उन मसौदा जुलाई दिशानिर्देशों के विरुद्ध अपील की है, जिनके अंतर्गत बहुसंख्यक विदेशी योगदान वाले AIFs को विदेशी संस्थाओं के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
पृष्ठभूमि
AIFs उन मसौदा दिशा-निर्देशों के विरुद्ध अपील कर रहे हैं जो बहुसंख्यक विदेशी योगदान वाले कोषों को FDI प्रतिबंधों के अधीन रख सकते हैं। उद्योग जगत का तर्क है कि यह वर्गीकरण पूंजी प्रवाह में बाधा उत्पन्न करेगा और उन्होंने भारतीय-प्रबंधित कोषों के लिए एक विशेष छूट (carve-out) का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यजुलाई के मसौदा दिशा-निर्देशों के तहत, अधिकांश विदेशी योगदान वाले AIFs को विदेशी संस्थाओं के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- तथ्यप्रस्तावित अपवाद: उद्योग जगत ने भारतीय-प्रबंधित फंड्स के लिए FDI प्रतिबंधों से छूट की मांग की है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
Alternative Investment Funds (AIFs) के लिए मसौदा दिशानिर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्रारूपित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य सभी AIFs को किसी भी प्रकार के FDI प्रतिबंधों से मुक्त करना है।
- यह उद्योग FDI प्रतिबंधों से भारतीय-प्रबंधित फंडों के लिए एक 'कार्व-आउट' (carve-out) की मांग कर रहा है।
- बहुसंख्यक विदेशी योगदान वाले AIFs को विदेशी संस्थाओं के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 3
- (c)केवल 1 और 3
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: ये दिशा-निर्देश बहुमत विदेशी योगदान वाले फंडों को FDI प्रतिबंधों के अधीन रख सकते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विदेशी वित्तपोषित निवेश साधनों को विदेशी संस्थाओं के रूप में वर्गीकृत करने के भारत के पूंजी बाजार की तरलता और व्यापार करने की सुगमता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।