मैटरनिटी लीव के बाद पद घटाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए 10 लाख रुपये
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· प्रीलिम्स + मेन्स·
चर्चा में क्यों
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश के पश्चात पदावनत की गई एक महिला को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है, जिसमें इस बात पर बल दिया गया है कि मातृत्व संरक्षण में व्यावसायिक स्थिति और करियर में उन्नति भी सम्मिलित है।
पृष्ठभूमि
दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक निजी फर्म को एक महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट को ₹10 लाख का मुआवजा और ₹1.5 लाख का व्यय भुगतान करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सुविधाएँ और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु छह महीने के भीतर नियम बनाने का भी निर्देश दिया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थादिल्ली उच्च न्यायालय: भारत में एक उच्च न्यायालय।
- तथ्यमुआवजा राशि: मातृत्व के कारण पदोन्नति में भेदभाव (maternity demotion retaliation) के लिए ₹10 लाख।
- पदन्यायमूर्ति सचिन दत्ता: मातृत्व संरक्षण निर्णय में पीठासीन न्यायाधीश।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय कार्यबल में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में मातृत्व अवकाश के दौरान और उसके बाद महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों के महत्व की चर्चा कीजिए।
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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