नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने असम सरकार के 2023-24 के बजट की आलोचना की है
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चर्चा में क्यों
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने असम सरकार के 2023-24 के बजट की आलोचना की है। CAG ने बजट में 'अवास्तविक' अनुमानों और बिना किसी आवश्यकता के अत्यधिक पूरक अनुदान (Supplementary Grants) को मंजूरी देने पर सवाल उठाए हैं।
पृष्ठभूमि
CAG ने ₹30,516.47 करोड़ की अप्रयुक्त धनराशि को अत्यधिक बचत के रूप में पहचाना है। इसने बिना किसी आवश्यकता के स्वीकृत ₹30,210.86 करोड़ की पूरक अनुदान (Supplementary Grants) राशि पर भी आपत्ति जताई है। साथ ही, CAG ने कई स्वायत्त परिषदों (Autonomous Councils) के उपयोग प्रमाण पत्र (Utilisation Certificates - UCs) न होने की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यअसम के लिए 2023-24 के लिए अप्रयुक्त फंड (unutilized funds): ₹30,516.47 करोड़।
- तथ्यअसम के लिए बिना आवश्यकता के ₹30,210.86 करोड़ के सप्लीमेंट्री ग्रांट्स (Supplementary Grants) को मंजूरी दी गई।
- तथ्ययूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स (UCs) जमा न करना बजट जवाबदेही (budgetary accountability) में एक बाधा के रूप में चिह्नित किया गया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राज्य स्तरीय बजटीय प्रबंधन में राजकोषीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। राज्य सरकारें धन के उपयोग की दक्षता में कैसे सुधार कर सकती हैं?
उत्तर के आयाम
- राजकोषीय रिसाव: बजट की मान्यताओं का ज़्यादा अनुमान, जिससे फंड का बड़ा हिस्सा बिना इस्तेमाल के रह गया और 'अत्यधिक बचत' हुई
- अकाउंटेबिलिटी गैप: ऑटोनॉमस बॉडीज में यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स की कमी से खर्चों की ट्रैकिंग में बाधा
- बजट का कुप्रबंधन: बिना ज़रूरत के पूरक अनुदान की मंजूरी वार्षिक बजट की शुचिता को कम करती है
मुख्य शब्द: राजकोषीय अनुशासन · बजट की निगरानी · उपयोगिता प्रमाणपत्र · सार्वजनिक जवाबदेही · राजकोषीय पारदर्शिता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।