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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु को 26 जुलाई तक ट्रांसजेंडर रिहैब स्कीम बनाने के निर्देश दिए

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Vulnerable sections (SC/ST, minorities, disabled, elderly, children)· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

मद्रास उच्च न्यायालय ने सामाजिक समावेश सुनिश्चित करनेके उद्देश्य से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए तालुक-स्तरीय पुनर्वास योजना बनाने हेतु तमिलनाडु सरकार को निर्देशित किया है।

पृष्ठभूमि

मदुरै बेंच के न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन ने 24 अप्रैल, 2026 को यह निर्देश जारी किया। न्यायालय ने 26 जुलाई तक एक व्यापक पुनर्वास योजना तैयार करने का आदेश दिया है, जिसकी अनुपालन रिपोर्ट 21 अगस्त तक प्रस्तुत की जानी अनिवार्य है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थामद्रास उच्च न्यायालय: भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय, जिसकी स्थापना 1862 में हुई थी।
  • तथ्यन्यायालय ने स्थानीय पुनर्वास के लिए योजना को 'taluk' स्तर पर लागू करने का निर्देश दिया।
  • पदमुख्य सचिव: राज्य प्रशासन में सर्वोच्च पदस्थ सिविल सेवक, जो कार्यकारी कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होते हैं।

मेन्स के लिए

Q. भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामाजिक-आर्थिक समावेश सुनिश्चित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और उनके प्रभावी पुनर्वास हेतु उचित उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • social stigma and systemic barriers
  • need for localized (taluk-level) intervention
  • legal framework vs. ground-level implementation

कीवर्ड: social inclusion · marginalized communities · judicial activism · rehabilitation · gender identity

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgments

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।