भ्रष्टाचार पर मौत की सज़ा ज़रूरी, जस्टिस अतुल श्रीधरन का बड़ा बयान
GS4नीतिशास्त्र· ईमानदारी, भ्रष्टाचार एवं सत्यनिष्ठा· मेन्स·
चर्चा में क्यों
इलाहाबाद High Court के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधर ने भारत में भ्रष्टाचार के सामान्यीकरण को रोकनेके लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में मृत्युदंड को शामिल करने हेतु संशोधन का सुझाव दिया है।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति श्रीधरन की 51 पृष्ठों की राय 'बुलडोजर न्याय' और अवैध ध्वस्तीकरण के संबंध में विभाजित निर्णय का एक हिस्सा थी। उन्होंने प्रणालीगत सत्यनिष्ठा के मुद्दों के संकेत के रूप में 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025' रिपोर्ट में 182 देशों में से भारत के 91वें स्थान का उल्लेख किया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकभ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) 1988 में अधिनियमित किया गया था।
- रिपोर्ट / सूचकांकTransparency International की 2025 की रिपोर्ट में भारत को 182 देशों में 91वें स्थान पर रखा गया है।
- संस्थाइलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश का मुख्य उच्च न्यायालय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में भ्रष्टाचार के प्रणालीगत सामान्यीकरण का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और संस्थागत अखंडता सुनिश्चित करने में मौजूदा कानूनी ढाँचों की प्रभावकारिता का मूल्यांकन कीजिए।
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।