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भाग I · स्था. 11.2025 
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थ्वेट्स ग्लेशियर कोपिघलने से बचाने के लिए बनेगा 80km का अंडरवॉटर बैरियर

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौते· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

वैज्ञानिक पश्चिम अंटार्कटिका में थ्वेट्स ग्लेशियर को पिघलने से बचाने के लिए 'सीबेड कर्टन प्रोजेक्ट' का एक भू-अभियांत्रिकी (geo-engineering) हस्तक्षेप के रूप में मूल्यांकन कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

सीबेड कर्टन परियोजना के अंतर्गत गर्म समुद्री धाराओं को मोड़ने के लिए 80 किमी लंबी और 150 मीटर ऊंची एक जलमग्न बाधा (अंडरवाटर बैरियर) का प्रस्ताव है। एक दक्षिण कोरियाई अभियान द्वारा जनवरी और मार्च 2026 के मध्य समुद्री धाराओं के व्यवहार पर डेटा एकत्र करने हेतु समुद्री मूरिंग्स (ocean moorings) स्थापित किए गए।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानथ्वेट्स ग्लेशियर (Thwaites Glacier): यह पश्चिम अंटार्कटिका में स्थित है, जिसे अक्सर 'डूज़मडे ग्लेशियर' (Doomsday Glacier) के रूप में संदर्भित किया जाता है।
  • तथ्यसीबेड कर्टन प्रोजेक्ट (Seabed Curtain Project): प्रस्तावित अवरोध (barrier) के आयाम 80 किमी की लंबाई और 150 मीटर तक की ऊंचाई हैं।
  • तथ्यपरियोजना लागत: अनुमानित US $40 बिलियन और $80 बिलियन के बीच।
  • तथ्यसमयरेखा: जनवरी और मार्च 2026 के बीच समुद्री मूरिंग्स (moorings) से डेटा संग्रह किया जाएगा; Svalbard fjord परीक्षणों के परिणाम सितंबर 2026 तक अपेक्षित हैं।
  • विज्ञान-तकनीकGeo-engineering: इस परियोजना का उद्देश्य गर्म जल धाराओं को भौतिक रूप से बाधित करके समुद्र के जलस्तर में होने वाली वृद्धि को कम करना है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: समुद्र के बढ़ते जलस्तर की समस्या के समाधान हेतु 'सीबेड कर्टन प्रोजेक्ट' (Seabed Curtain Project) जैसे बड़े पैमाने पर भू-अभियांत्रिकी (geo-engineering) हस्तक्षेपों की व्यवहार्यता और उनके पारिस्थितिक जोखिमों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया ↗यह भी: GS1 · भौतिक भूगोल (भू-आकृतियां, महासागर, जलवायु)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।