भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (Renewable Energy Capacity) के विस्तार के साथ, काउंसिल ऑन एनर्जी
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चर्चा में क्यों
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (Renewable Energy Capacity) के विस्तार के साथ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने सोलर पैनल कचरे के प्रबंधन की बढ़ती चुनौती पर प्रकाश डाला है।
पृष्ठभूमि
भारत में 2047 तक 11 मिलियन टन से अधिक सोलर वेस्ट (सौर अपशिष्ट) उत्पन्न होने का अनुमान है। हालांकि सोलर पैनल मुख्य रूप से रिसाइकिल (पुनर्चक्रण योग्य) किए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में देश में इस कचरे की मात्रा को प्रबंधित करने के लिए समर्पित रिसाइकिलिंग सुविधाओं और पर्याप्त निवेश की कमी है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यCEEW के अनुमान के अनुसार, भारत 2047 तक 11 मिलियन टन से अधिक सोलर वेस्ट (solar waste) पैदा कर सकता है।
- विज्ञान-तकनीकसोलर पैनल्स को मुख्य रूप से रिसाइक्लेबल (recyclable) मटेरियल के रूप में वर्णित किया गया है।
- संस्थाCouncil on Energy, Environment and Water (CEEW) वह संस्था है जो वेस्ट (waste) के अनुमान प्रदान करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण में सौर अपशिष्ट प्रबंधन से उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय और तार्किक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा सौर क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) के लिए एक रूपरेखा का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: 2047 तक होने वाले 11 मिलियन टन कचरे को संभालने के लिए समर्पित रीसाइक्लिंग सुविधाओं की कमी
- सर्कुलर इकोनॉमी की बाधा: पर्यावरण क्षरण रोकने के लिए रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी के लिए भारी निवेश की ज़रूरत
- पॉलिसी-इम्प्लीमेंटेशन गैप: क्लीन एनर्जी लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए मज़बूत वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की ज़रूरत
मुख्य शब्द: सर्कुलर इकोनॉमी · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · वेस्ट मैनेजमेंट · पर्यावरण का क्षरण · सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।