राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दस्तावेज़ के शताब्दी वर्ष के दौरान समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए ओल चिकी लिपि में संताली भाषा में भारत का संविधान जारी किया
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चर्चा में क्यों
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दस्तावेज़ के शताब्दी वर्ष के दौरान समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए ओल चिकी लिपि में संताली भाषा में भारत का संविधान जारी किया।
पृष्ठभूमि
संविधान को राष्ट्रपति भवन में संथाली भाषा में जारी किया गया। इस विमोचन की सुविधा केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के नेतृत्व में विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानराष्ट्रपति भवन: संविधान के संताली संस्करण के विमोचन का स्थल।
- तथ्यसंथाली: भारत में एक प्राचीन और व्यापक रूप से बोली जाने वाली जनजातीय भाषा।
- तथ्यओल चिकी (Ol Chiki): संविधान के संताली भाषा संस्करण के लिए उपयोग की जाने वाली लिपि।
- पदअर्जुन राम मेघवाल: केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हाशिए पर स्थित समुदायों के बीच समावेशी शासन और संवैधानिक साक्षरता को बढ़ावा देने में संविधान का जनजातीय भाषाओं में अनुवाद करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- भाषाई समावेशिता: कानूनी ढांचों और आदिवासी आबादी के बीच की दूरी को कम करना
- संवैधानिक साक्षरता: गैर-प्रमुख भाषाओं में मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- सांस्कृतिक संरक्षण: आधिकारिक राज्य दस्तावेज़ों में ओल चिकी जैसी जनजातीय लिपियों को मान्यता देना
मुख्य शब्द: समावेशी शासन · संवैधानिक साक्षरता · भाषाई विविधता · जनजातीय सशक्तिकरण · कानूनी पहुंच
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।