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India's Ground Truth Record
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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

भारत की स्पेस इकोनॉमी की वैल्यू 8.4 बिलियन डॉलर, 400 से ज़्यादा स्टार्टअप्स शामिल

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· Space technology (ISRO, missions)· Prelims + Mains·

चर्चा में क्यों

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है, जिसमें वर्तमान में 400 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं और 2033 तक 44 बिलियन डॉलर के उद्योग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस प्रगति को Skyroot Aerospace द्वारा आगामी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट प्रक्षेपण के माध्यम से रेखांकित किया गया है।

पृष्ठभूमि

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का वर्तमान मूल्य $8.4 बिलियन है। ISRO ने अब तक 430 से अधिक विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2033 तक $44 बिलियन का अंतरिक्ष उद्योग विकसित करना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्य2024 तक भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य $8.4 बिलियन है।
  • तथ्यभारत का लक्ष्य 2033 तक $44 बिलियन का अंतरिक्ष उद्योग प्राप्त करना है।
  • विज्ञान-तकनीकSkyroot Aerospace एक प्रमुख निजी खिलाड़ी है जिसका लक्ष्य भारत का पहला निजी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट लॉन्च करना है।
  • तथ्यISRO ने 430 से अधिक विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है।

मेन्स के लिए

Q. भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण के महत्व और 2033 तक 44 बिलियन डॉलर के उद्योग लक्ष्य को प्राप्त करने में निजी स्टार्टअप्स की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Market liberalization: Transition from ISRO-led monopoly to a public-private partnership model to foster innovation.
  • Infrastructure bottleneck: Requirement for high-frequency launch pads and specialized testing facilities for private orbital-class rockets.
  • Global competitiveness: Leveraging low-cost manufacturing and high-reliability satellite launches to capture international market share.

कीवर्ड: Space Liberalization · Orbital-class Rocket · Public-Private Partnership · Space Economy · Strategic Autonomy

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: NDTV ↗यह भी: GS3 · Industry, investment & MSMEs

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।