कर्नाटक हाई कोर्ट ने मुआवजे के भुगतान में 17 साल की देरी होने के कारण बैंगलोर-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया है
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चर्चा में क्यों
कर्नाटक हाई कोर्ट ने मुआवजे के भुगतान में 17 साल की देरी होने के कारण बैंगलोर-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया है।
पृष्ठभूमि
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु के थलघट्टपुरा गांव में एक एकड़ भूमि से संबंधित अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया है। कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) 17 वर्षों तक इस भूमि पर कब्जा लेने या मुआवजे का निर्धारण करने में विफल रहा।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाKIADB: कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट बोर्ड (Karnataka Industrial Areas Development Board) इस मामले में भूमि अधिग्रहण (land acquisition) के लिए जिम्मेदार अथॉरिटी है।
- स्थानथलगट्टपुरा गाँव कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित है।
- तथ्यभूमि अधिग्रहण की अधिसूचना (notification) 17 वर्षों की अवधि के लिए लंबित थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में होने वाले दीर्घकालिक विलंब के कानूनी और प्रक्रियात्मक निहितार्थों तथा निजी संपत्ति के अधिकारों पर उनके प्रभाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रक्रियात्मक चूक: मुआवजे के फैसले न होने के कारण वैध अधिग्रहण नोटिफिकेशन रद्द किए गए
- संपत्ति के अधिकार: स्टेट की एमिनेन्ट डोमेन पावर और समय पर मुआवजे के अधिकार के बीच टकराव
- प्रशासनिक सुस्ती: KIADB भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में समय-बद्ध तंत्र की कमी
मुख्य शब्द: एमिनेन्ट डोमेन · संपत्ति का अधिकार · प्रशासनिक देरी · न्यायिक समीक्षा · भूमि अधिग्रहण
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