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भाग I · स्था. 11.2025 
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बैंकों में 10% तक की हिस्सेदारी फिर से खरीदने के लिए RBI का नया प्रस्ताव

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

RBI ने संस्थागत निवेशकों के लिए एक बार की अनुमति का प्रस्ताव दिया है, जिसके अंतर्गत यदि उनकी हिस्सेदारी 5% से कम हो जाती है, तो वे बिना किसी अतिरिक्त सहमति के बैंकों में 10% तक की हिस्सेदारी पुनः प्राप्त कर सकेंगे।

पृष्ठभूमि

यह प्रस्ताव, 'RBI (Commercial Banks — Acquisition and Holding of Shares or Voting Rights) Amendment Directions, 2026' के प्रारूप का एक हिस्सा है। पात्र संस्थाओं में SEBI, IRDAI, या PFRDA के पास पंजीकृत म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ और पेंशन फंड शामिल हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाRBI: भारत का केंद्रीय बैंक जो बैंकिंग क्षेत्र और मौद्रिक नीति (monetary policy) को विनियमित करने के लिए उत्तरदायी है।
  • तथ्यRBI की अतिरिक्त सहमति के बिना पुन: अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित सीमा बैंक की हिस्सेदारी के 10% तक है।
  • तथ्यइस एकमुश्त अनुमोदन (one-time approval) के लिए ट्रिगर तब होता है जब किसी संस्थान की होल्डिंग 5% से नीचे गिर जाती है।
  • संस्थाSEBI, IRDAI, और PFRDA: क्रमशः म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड के संबंधित नियामक निकाय।

मेन्स के लिए

प्रश्न: संस्थागत निवेशकों के लिए शेयरधारिता मानदंडों को सरल बनाने से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की पूंजी संरचना और स्थिरता को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है, चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।