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भाग I · स्था. 11.2025 
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RTI जवाब मिलने में देरी, तमिलनाडु इन्फॉर्मेशन कमीशन ने ऑनलाइन सिस्टम की मांग की

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चर्चा में क्यों

तमिलनाडु सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के आवेदनों के प्रत्युत्तर में होने वाले महत्वपूर्ण विलंब को दूर करनेके लिए राज्य सरकार से एक सुव्यवस्थित ऑनलाइन प्रणाली अपनाने का आग्रह किया है।

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु सूचना आयोग ने ऑनलाइन प्रविष्टियों के प्रबंधन में लोक सूचना अधिकारियों (PIOs) द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों को रेखांकित किया है। आयोग ने सिफारिश की है कि ऑनलाइन फाइलिंग को सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागीय वेबसाइटों में आयोग की वेबसाइट के प्रत्यक्ष लिंक शामिल किए जाएं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थासूचना आयोग: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की निगरानी के लिए उत्तरदायी एक वैधानिक निकाय।
  • तथ्यRTI Act, 2005: यह नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना मांगने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
  • पदमुख्य सूचना आयुक्त: तमिलनाडु में राज्य सूचना आयोग के प्रमुख।

मेन्स के लिए

Q. सूचना के अधिकार (RTI) के आवेदन हेतु हस्तचालित (मैनुअल) से डिजिटल प्रणाली की ओर संक्रमण सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है, तथा इस प्रक्रिया में लोक सूचना अधिकारियों (PIOs) के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • Administrative bottleneck: Inadequate technical infrastructure and lack of standardized online portals across diverse state departments
  • Digital divide: Potential exclusion of rural populations with limited internet access from the online RTI filing mechanism
  • Accountability gap: Delays in RTI responses undermining the 'Right to Know' as a fundamental democratic pillar

कीवर्ड: Transparency · Right to Information · E-governance · Public Accountability · Administrative Efficiency

पूरी खबर पढ़ें →स्रोत: The Hindu ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।