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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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IMD ने 4 जून, 2026 को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन की घोषणा की, जो भारत की जल और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण वर्षा ऋतु का सूत्रपात करता है

GS1इतिहास · समाज · भूगोल· भूभौतिकीय घटनाएं (भूकंप, चक्रवात, ज्वालामुखी)· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

IMD ने 4 जून, 2026 को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन की घोषणा की, जो भारत की जल और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण वर्षा ऋतु का सूत्रपात करता है।

पृष्ठभूमि

दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 80% प्रदान करता है। यह हिंद महासागर से उत्पन्न होता है, जहाँ नमी से लदी हवाएँ पश्चिमी घाट से टकराती हैं, जिससेतापीय संकुचन (adiabatic cooling) और वर्षा की प्रक्रिया होती है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानकेरल भारत का पहला भूभाग है जहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन होता है।
  • विज्ञान-तकनीकएडियाबेटिक कूलिंग (Adiabatic cooling): वह प्रक्रिया जिसमें अरब सागर से आने वाली नमी युक्त हवाएं पश्चिमी घाटों के ऊपर ऊपर उठते समय ठंडी हो जाती हैं।
  • तथ्यदक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की कुल वार्षिक वर्षा में लगभग 80% का योगदान देता है।
  • संस्थाभारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD): मानसून के पैटर्न की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार एजेंसी।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की खाद्य सुरक्षा और जलविद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने में दक्षिण-पश्चिम मानसून के महत्व का विश्लेषण कीजिए, तथा अनिश्चित मानसून पैटर्न के ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · फसल पैटर्न एवं सिंचाई

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।