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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत सरकार ने मौजूदा परमाणु कानूनों को निरस्त करने और पिछले लायबिलिटी क्लॉज (liability clauses) को हटाकर निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए SHANTI एक्ट लागू किया है

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चर्चा में क्यों

भारत सरकार ने मौजूदा परमाणु कानूनों को निरस्त करने और पिछले लायबिलिटी क्लॉज (liability clauses) को हटाकर निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए SHANTI एक्ट लागू किया है।

पृष्ठभूमि

SHANTI एक्ट (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) पिछले परमाणु कानूनों का स्थान लेता है। इसका लक्ष्य स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (Small Modular Reactors - SMRs) पर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारत की वर्तमान 8.8 GW की परमाणु क्षमता को 2047 तक बढ़ाकर 100 GW तक पहुँचाने में मदद करना है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकSHANTI Act: निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए मौजूदा परमाणु कानून को निरस्त करता है।
  • तथ्यभारत की वर्तमान परमाणु क्षमता: 8.8 GW।
  • तथ्य2047 तक भारत का न्यूक्लियर कैपेसिटी टारगेट: 100 GW।
  • विज्ञान-तकनीकSmall Modular Reactors (SMRs): इन्हें भारत के परमाणु विस्तार (nuclear expansion) के लिए एक प्रमुख तकनीक के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यSHANTI Act: यह प्लांट के साइज के आधार पर अलग-अलग पेनल्टी के साथ एक सुव्यवस्थित मुआवजा दृष्टिकोण (compensation approach) स्थापित करता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: यह विश्लेषण कीजिए कि शांति (SHANTI) अधिनियम किस प्रकार सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन की चिंताओं को संबोधित करते हुए भारत के परमाणु-प्रधान ऊर्जा मिश्रण की ओर संक्रमण को सुगम बना सकता है।

उत्तर के आयाम

  • प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप: प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के प्रोत्साहन और सख्त सेफ्टी ओवरसाइट और लायबिलिटी फ्रेमवर्क के बीच संतुलन
  • तकनीकी बदलाव: स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स की स्केलेबिलिटी और वेस्ट-मैनेजमेंट व्यवहार्यता का मूल्यांकन
  • रेगुलेटरी रिफॉर्म: प्राइवेट कैपिटल को प्रभावित किए बिना जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक्सीडेंट कंपनसेशन मैकेनिज्म को आसान बनाना

मुख्य शब्द: परमाणु विस्तार · स्मॉल मॉडुलर रिएक्टर्स · निजी भागीदारी · लायबिलिटी फ्रेमवर्क · ऊर्जा सुरक्षा

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · विधेयक, अधिनियम एवं अध्यादेशयह भी: GS3 · बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।