राजस्थान में नागरिक अधिकार समूहों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की समय-सीमा बढ़ाने और मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए इसमें शामिल अपवर्जन की शर्तों को हटाने की मांग की है
GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· कमजोर वर्ग (SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, बुजुर्ग, बच्चे)· मेन्स·
चर्चा में क्यों
राजस्थान में नागरिक अधिकार समूहों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की समय-सीमा बढ़ाने और मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए इसमें शामिल अपवर्जन की शर्तों को हटाने की मांग की है।
पृष्ठभूमि
जयपुर में आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई में यह सामने आया कि 2002 की मतदाता सूची तक पहुंच न होने के कारण व्यक्तियों को घर से बेदखली और नाम रद्द होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समूहों ने 9 दिसंबर से एक सोशल ऑडिट (Social Audit) प्रक्रिया शुरू करने और आधार को एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव दिया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यराजस्थान में वोटर लिस्ट अपडेट के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) प्रक्रिया।
- तथ्यसमूहों ने 9 दिसंबर से शुरू होने वाली सोशल ऑडिट (Social Audit) प्रक्रिया का प्रस्ताव दिया।
- तथ्यआधार (Aadhaar): SIR प्रोसेस के लिए एक वैध डॉक्यूमेंट के रूप में प्रस्तावित।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मतदाता सूची के अद्यतनीकरण में हाशिए पर रहने वाले समुदायों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए और समावेशी लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- डॉक्यूमेंटेशन की बाधा: पहचान सत्यापन के लिए 2002 की पुरानी मतदाता सूची तक पहुँचने में कठिनाई
- प्रक्रियात्मक बहिष्कार: गहन पुनरीक्षण के दौरान मनमाने नाम कटने और बेदखली का जोखिम
- पारदर्शिता की कमी: ड्राफ्ट मतदाता सूची का सार्वजनिक प्रदर्शन और सोशल ऑडिट मैकेनिज्म की ज़रूरत
मुख्य शब्द: मतदाता सूची से नाम हटाना · सोशल ऑडिट · समावेशी शासन · प्रक्रियात्मक न्याय · हाशिए पर रहने वाले समुदाय
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।