RBI ने विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश करने पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया है
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चर्चा में क्यों
RBI ने विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश करने पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटा दिया है, ताकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) से इतर पूंजी के स्रोतों में विविधता लाई जा सके।
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में विदेशी व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने हेतु नीतिगत परिवर्तन की पहल की है। इस कदम का उद्देश्य ब्रोकर्स, एक्सचेंजों, डिपॉजिटरीज़ और कस्टोडियंस से जुड़े एक नए निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाRBI: भारत का केंद्रीय बैंक जो मौद्रिक नीति और वित्तीय प्रणाली के विनियमन के लिए उत्तरदायी है।
- तथ्यFPI: Foreign Portfolio Investors वे संस्थाएं हैं जो स्टॉक, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय संपत्तियों में निवेश करती हैं।
- तथ्यसूचीबद्ध कंपनियाँ (Listed Companies): वे कंपनियाँ जिनके शेयर NSE या BSE जैसे सार्वजनिक स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार करते हैं।
मेन्स के लिए
Q. विदेशी पूंजी निवेश के स्रोतों में विविधता लाना वैश्विक अस्थिरता के विरुद्ध भारत के पूंजी बाजारों की सुदृढ़ता को किस प्रकार बढ़ा सकता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Regulatory friction: Complexity in bank account opening and tax compliance for non-resident individuals.
- Market depth: Potential for increased liquidity and retail participation from global individual investors.
- Compliance burden: High demand for specialized tax and regulatory advisory services for cross-border retail flows.
कीवर्ड: Capital Market Liquidity · Regulatory Liberalization · Foreign Direct Investment · Portfolio Investment · Financial Inclusion
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।