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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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मेघालय में नियांतसर सिकाडा (niangtaser cicada) का उद्भव एक दुर्लभ जैविक घटना के रूप में रेखांकित किया गया है

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· जैव विविधता एवं संरक्षण· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

मेघालय में नियांतसर सिकाडा (niangtaser cicada) का उद्भव एक दुर्लभ जैविक घटना के रूप में रेखांकित किया गया है, जो मानसून चक्र और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

पृष्ठभूमि

नियांगटासर सिकाडा (niangtaser cicada) मेघालय में पहचानी गई एक नवीन प्रजाति है, जो चार वर्ष के चक्र के लिए भूमिगत रहती है। इसका उद्भव वार्षिक मानसून के साथ मेल खाते विशिष्ट मृदा आर्द्रता और तापमान परिवर्तनों द्वारा प्रेरित होता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पर्यावरणNiangtaser cicada: भारत के मेघालय में पहचानी गई एक नई कीट प्रजाति।
  • तथ्यNiantaser cicada एक चार-वर्षीय भूमिगत उद्भव चक्र (underground emergence cycle) का पालन करता है।
  • स्थानसैडेन गाँव, मेघालय: नियांतसर (niangtaser) सिकाडा के उद्भव का प्राथमिक स्थल।
  • विज्ञान-तकनीकपर्यावरणीय कारक: मृदा की नमी और तापमान में परिवर्तन सिकाडा (cicada) के उद्भव चक्र को निर्धारित करते हैं।

मेन्स के लिए

प्रश्न: स्थानीय सांस्कृतिक पहचानों को आकार देने में स्वदेशी जैव विविधता के महत्व और पूर्वोत्तर भारत में ऐसे विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: अल जज़ीरा ↗यह भी: GS1 · चर्चित स्थान / मानचित्र

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।