नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कर्नाटक की आपदा प्रबंधन प्रणाली में मौजूद प्रणालीगत कमियों और बुनियादी ढांचे के अंतराल को उजागर करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है
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चर्चा में क्यों
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कर्नाटक की आपदा प्रबंधन प्रणाली में मौजूद प्रणालीगत कमियों और बुनियादी ढांचे के अंतराल को उजागर करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है।
पृष्ठभूमि
CAG की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 2008 में KSDMA की स्थापना के बावजूद, कर्नाटक के पास 2020 तक एक व्यापक आपदा नीति (Disaster Policy) का अभाव था। रिपोर्ट में दोषपूर्ण वेदर स्टेशनों, टेलीमेट्रिक रेन गेज और डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यूनिट्स में रिक्त पदों की उच्च दर की पहचान की गई है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाKSDMA: कर्नाटक स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (Karnataka State Disaster Management Authority) की स्थापना 2008 में की गई थी।
- संस्थाKSNMDC: कर्नाटक स्टेट नोडल मॉनिटरिंग कमेटी (Karnataka State Nodal Monitoring Committee) वेदर स्टेशनों और रेन गेज (rain gauges) के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यCAG ने डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यूनिट्स में उच्च रिक्तियों (vacancy rates) और फंड के दुरुपयोग की पहचान की।
- तथ्यकर्नाटक राज्य के पास 2020 तक कोई व्यापक डिजास्टर पॉलिसी (disaster policy) नहीं थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: कर्नाटक पर केंद्रीय लेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आलोक में, राज्य-स्तरीय आपदा प्रबंधन में मौजूद संस्थागत और ढांचागत कमियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: खराब वेदर स्टेशन और टेलीमेट्रिक रेन गेज रियल-टाइम अर्ली वार्निंग सिस्टम में बाधा डाल रहे हैं
- ह्यूमन रिसोर्स बॉटलनैक: डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यूनिट्स में खाली पदों की वजह से आपातकालीन रिस्पॉन्स में देरी
- पॉलिसी-इम्प्लीमेंटेशन गैप: मौजूदा अथॉरिटी के बावजूद 2020 तक व्यापक डिजास्टर पॉलिसी बनाने में देरी
मुख्य शब्द: आपदा प्रबंधन · संस्थागत जवाबदेही · अर्ली वार्निंग सिस्टम · संसाधन आवंटन · सार्वजनिक ऑडिट
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।