IISER कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है
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चर्चा में क्यों
IISER कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें खुलासा किया गया है कि भारत के प्रमुख शहरों में रहने वाले लोग प्रतिदिन औसतन 132 माइक्रोग्राम माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) अंदर लेते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।
पृष्ठभूमि
अध्ययन में हवा में 11 प्रकार के प्लास्टिक की पहचान की गई है, जिसके टुकड़े मुख्य रूप से पैकेजिंग और टायरों के घिसने से उत्पन्न होते हैं। मुख्य शोधकर्ता डॉ. गोपाला कृष्ण दर्भा ने इन जोखिमों को कम करने के लिए सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (single-use plastics) पर प्रतिबंध लगाने और पुनर्चक्रित कपड़ों (recycled fabrics) को बढ़ावा देने की वकालत की है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यप्रमुख भारतीय शहरों में माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) के औसत दैनिक इनहेलेशन (inhalation) की मात्रा: 132 माइक्रोग्राम।
- तथ्यशहरी हवा में पहचाने गए प्लास्टिक के प्रकारों की संख्या: 11।
- तथ्यइनहेलेबल माइक्रोप्लास्टिक्स (Inhalable microplastics) के प्राथमिक स्रोत: पैकेजिंग और टायर वियर (Tire wear)।
- संस्थाIISER कोलकाता: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च कोलकाता।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी परिवेश में श्वास योग्य सूक्ष्म-प्लास्टिक (inhalable microplastics) के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए और भारत में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दीजिए। चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- स्वास्थ्य जोखिम: माइक्रोप्लास्टिक के सांस के ज़रिए अंदर जाने से पुरानी श्वसन संबंधी समस्याएं और सिस्टमिक टॉक्सिसिटी का खतरा
- रेगुलेटरी गैप: शहरी एयर क्वालिटी इंडेक्स में एयरबोर्न माइक्रोप्लास्टिक्स की स्टैंडर्ड मॉनिटरिंग की ज़रूरत
- वेस्ट मैनेजमेंट: रिसाइकिल किए गए कपड़ों के ज़रिए लीनियर प्लास्टिक यूज़ से सर्कुलर इकोनॉमी की ओर बदलाव
मुख्य शब्द: माइक्रोप्लास्टिक्स · सार्वजनिक स्वास्थ्य · शहरी वायु गुणवत्ता · सर्कुलर इकोनॉमी · सिंगल-यूज़ प्लास्टिक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।