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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत ने रूस के Su-57 फाइटर जेट, लंबी दूरी के ड्रोन और पनडुब्बियों की आपूर्ति के प्रस्ताव में कम दिलचस्पी दिखाई है

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चर्चा में क्यों

भारत ने रूस के Su-57 फाइटर जेट, लंबी दूरी के ड्रोन और पनडुब्बियों की आपूर्ति के प्रस्ताव में कम दिलचस्पी दिखाई है। इसके बजाय, भारत ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन (Indigenous defense production) को प्राथमिकता दी है।

पृष्ठभूमि

रूस ने Su-57 जेट्स और पनडुब्बियों (submarines) सहित भारत के साथ रक्षा सहयोग के विस्तार का प्रस्ताव दिया है। भारत सरकार वर्तमान में घरेलू उत्पादन क्षमताओं को प्राथमिकता दे रही है और देश ने रक्षा निर्यात और उत्पादन मूल्य में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • विज्ञान-तकनीकSu-57: रूस में निर्मित एक मल्टीरोल फाइटर जेट।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की रक्षा खरीद रणनीति में पारंपरिक आयात से स्वदेशी उत्पादन की ओर हुए बदलाव का विश्लेषण कीजिए। यह परिवर्तन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को किस प्रकार प्रभावित करता है? विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: संप्रभु तकनीकी क्षमताएं सुनिश्चित करने के लिए विदेशी OEMs पर निर्भरता कम करना
  • आत्मनिर्भर भारत: उन्नत रूसी प्लेटफॉर्म्स की भारी लागत की भरपाई के लिए घरेलू उत्पादन का इस्तेमाल
  • ट्रेड-ऑफ: तत्काल तकनीकी जरूरतों और स्वदेशी आरएंडडी और मैन्युफैक्चरिंग के दीर्घकालिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना

मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · स्वदेशी उत्पादन · डिफेंस डिप्लोमेसी · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा निर्यात

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · रक्षा तकनीकयह भी: GS3 · उद्योग, निवेश एवं MSME

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।