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भाग I · स्था. 11.2025 
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सुप्रीम कोर्ट ने एक 32 वर्षीय मरीज के लिए लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दे दी है

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चर्चा में क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने एक 32 वर्षीय मरीज के लिए लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दे दी है, जो इस सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पैसिव यूथेनेसिया (Passive Euthanasia) के पहले व्यावहारिक प्रयोग को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

अदालत ने हरीश राणा के मामले पर फैसला सुनाया, जो गंभीर सिर की चोट के कारण 13 साल से अधिक समय से बिस्तर पर पड़े थे। यह निर्णय मरीज के परिवार, मेडिकल बोर्ड और कानूनी सलाहकारों के साथ परामर्श के बाद लिया गया।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पदसुप्रीम कोर्ट: भारत की सर्वोच्च अदालत जो पैसिव यूथेनेशिया (passive euthanasia) पर फैसला देने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यहरीश राणा: हेड इंजरी (head injuries) के कारण 13 साल से अधिक समय से बिस्तर पर पड़े रहने वाले 32 वर्षीय मरीज।
  • तथ्यपैसिव यूथेनेसिया (Passive Euthanasia): गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट को हटाना।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में 'गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार' और 'जीवन के अधिकार' के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, 'निष्क्रिय इच्छामृत्यु' (passive euthanasia) से जुड़े नैतिक और कानूनी जटिलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • मेडिकल एथिक्स: जीवन बचाने के डॉक्टर के कर्तव्य और मरीज के गरिमा के अधिकार के बीच संतुलन
  • न्यायिक निगरानी: लाइफ-सपोर्ट हटाने के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • कानूनी अस्पष्टता: एक्टिव यूथेनेसिया और पैसिव ट्रीटमेंट विड्रॉल के बीच अंतर

मुख्य शब्द: जीवन का अधिकार · पैसिव यूथेनेसिया · मेडिकल एथिक्स · न्यायिक समीक्षा · गरिमा

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसलेयह भी: GS4 · लोक प्रशासन में नैतिकता

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।