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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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यह लेख सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर बढ़ते तनाव पर प्रकाश डालता है

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· भारत एवं पड़ोसी देश· मेन्स·

चर्चा में क्यों

यह लेख सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर बढ़ते तनाव पर प्रकाश डालता है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत की जलविद्युत परियोजनाएं बेसिन पर दबाव डाल रही हैं, जबकि भारत ने संधि के नियमों का पालन करने का दावा किया है।

पृष्ठभूमि

सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे। पाकिस्तान अपनी कृषि और अस्तित्व के लिए सिंधु नदी तंत्र पर अत्यधिक निर्भर है, जबकि भारत का दावा है कि उसकी परियोजनाएं संधि के प्रावधानों के भीतर ही हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाइंडस वाटर्स ट्रीटी (Indus Waters Treaty): भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हस्ताक्षरित एक जल-साझाकरण समझौता।
  • तथ्यकृषि और अस्तित्व के लिए पाकिस्तान की सिंधु नदी प्रणाली (Indus River system) पर भारी निर्भरता।

मेन्स के लिए

प्रश्न: सिंधु बेसिन में सीमा पार जल प्रबंधन किस प्रकार भारत और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय सहयोग और भू-राजनीतिक घर्षण, दोनों के लिए एक उपकरण के रूप में कार्य करता है, चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • हाइड्रो-हेजेमनी: जल उपयोग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में असमानता जिससे निचले इलाकों के रिपेरियन अधिकारों पर असर पड़ता है
  • संस्थागत टकराव: आधुनिक जलवायु-प्रेरित जल संकट से निपटने में 1960 की संधि की सीमाएं
  • सुरक्षा-जल नेक्सस: साझा वस्तु से राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता तक जल संसाधनों का बदलाव

मुख्य शब्द: सीमा पार जल प्रबंधन · हाइड्रो-हेजेमनी · तटीय अधिकार · भू-राजनीतिक तनाव · संसाधनों की कमी

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।