प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में गहरे होते रणनीतिक गठबंधन को रेखांकित करती है
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चर्चा में क्यों
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में गहरे होते रणनीतिक गठबंधन को रेखांकित करती है, जो पाकिस्तान की क्षेत्रीय सुरक्षा गणना (Security Calculus) को बदल सकती है।
पृष्ठभूमि
भारत-इजरायल साझेदारी में 2017 से तेजी आई है, जिसमें रक्षा संबंधों, तकनीकी सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इजरायल इस गठबंधन के माध्यम से 'इस्लामिक कट्टरपंथ' का मुकाबला करने का लक्ष्य रखता है, जबकि पाकिस्तान गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (Gulf Cooperation Council) के साथ बदलते संबंधों के बीच अपनी स्थिति को संतुलित कर रहा है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यभारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी (strategic partnership) के त्वरण की अवधि: 2017 से।
- स्थानगल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (Gulf Cooperation Council - GCC): सऊदी अरब सहित एक क्षेत्रीय ब्लॉक।
- पदनरेंद्र मोदी: भारत के प्रधानमंत्री।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत और इज़राइल के बीच गहराते रक्षा और प्रौद्योगिकी संबंधों का क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना और मध्य पूर्व में पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- रणनीतिक पुनर्गठन: भारत-सऊदी-इजरायल सहयोग के कारण पाकिस्तान के क्षेत्रीय प्रभाव में बदलाव
- सुरक्षा ढांचा: दक्षिण एशिया में कट्टरपंथ विरोधी प्रयासों पर इंटेलिजेंस शेयरिंग का प्रभाव
- भू-राजनीतिक संतुलन: भारत-इजरायल संबंधों के बीच पाकिस्तान द्वारा गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ संबंधों को साधने की कोशिश
मुख्य शब्द: रणनीतिक गठबंधन · क्षेत्रीय सुरक्षा · काउंटर-रेडिकलिज्म · भू-राजनीतिक पुनर्गठन · रक्षा सहयोग
अंतर्राष्ट्रीय संबंध पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।