सुप्रीम कोर्ट ने चार व्यक्तियों द्वारा दायर एक नई याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने चार व्यक्तियों द्वारा दायर एक नई याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बंगाली मूल के मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव भड़काने वाले नफरत भरे भाषण दिए हैं।
पृष्ठभूमि
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयान विशिष्ट समुदायों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। यह याचिका कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और CPI नेता एनी राजा द्वारा दायर की गई एक पिछली याचिका के बाद आई है, जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा मुस्लिमों के प्रति शत्रुता बढ़ाने के लिए की गई कार्रवाई के खिलाफ कदम उठाने की मांग की गई थी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदहिमंत बिस्वा सरमा: असम के मुख्यमंत्री।
- तथ्ययह याचिका चार व्यक्तियों द्वारा दायर की गई थी और CPI(M) और CPI नेता एनी राजा द्वारा एक अलग याचिका दायर की गई थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हेट स्पीच (नफरत भरे भाषण) पर अंकुश लगाने और भेदभावपूर्ण कार्यकारी कार्रवाइयों के विरुद्ध अल्पसंख्यक अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक निगरानी: अभिव्यक्ति की आज़ादी और सांप्रदायिक हिंसा रोकने की राज्य की ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन
- संवैधानिक संरक्षण: भेदभावपूर्ण सार्वजनिक विमर्श के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को सुनिश्चित करना
- कार्यपालिका की जवाबदेही: भड़काऊ बयान देने वाले उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने के तंत्र
मुख्य शब्द: हेट स्पीच · न्यायिक समीक्षा · सांप्रदायिक सद्भाव · अल्पसंख्यक अधिकार · कार्यपालिका की जवाबदेही
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।