ओडिशा, कर्नाटक और केरल में घोंसला बनाने वाली जगहों (nesting sites) पर पर्यटन के लिए 'टर्टल ट्रेल्स' (turtle trails) विकसित करने के केंद्रीय बजट प्रस्ताव पर संरक्षणवादियों और शोधकर्ताओं ने चिंता जताई है
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चर्चा में क्यों
ओडिशा, कर्नाटक और केरल में घोंसला बनाने वाली जगहों (nesting sites) पर पर्यटन के लिए 'टर्टल ट्रेल्स' (turtle trails) विकसित करने के केंद्रीय बजट प्रस्ताव पर संरक्षणवादियों और शोधकर्ताओं ने चिंता जताई है।
पृष्ठभूमि
केंद्रीय बजट में ओडिशा, कर्नाटक और केरल के नेस्टिंग साइट्स (nesting sites) पर 'टर्टल ट्रेल्स' (turtle trails) का प्रस्ताव दिया गया है। वन्यजीव कार्यकर्ता बिस्वजीत मोहंती ने चेतावनी दी है कि इस तरह का ईकोटूरिज्म (ecotourism) लुप्तप्राय ऑलिव रिडले समुद्री कछुओं के सामूहिक नेस्टिंग में बाधा डाल सकता है। उन्होंने चिल्का झील के डॉल्फिन आवास में पहले हुई गड़बड़ियों का भी उदाहरण दिया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पर्यावरणओलिव रिडले (Olive Ridley) समुद्री कछुए एक संकटग्रस्त प्रजाति (endangered species) हैं जो सामूहिक नेस्टिंग (mass nesting) के लिए जाने जाते हैं।
- स्थानओडिशा, कर्नाटक और केरल में टर्टल ट्रेल्स (turtle trails) बनाने की योजना प्रस्तावित है।
- तथ्यलाइट पोल्यूशन (Light pollution) को एक ऐसे विशिष्ट कारक के रूप में पहचाना गया है जो कछुओं को नेस्टिंग (nesting) से विचलित कर सकता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विलुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों के संवेदनशील प्रजनन आवासों की पारिस्थितिक अखंडता सुनिश्चित करने और पारिस्थितिक-पर्यटन (इकोटूरिज्म) को बढ़ावा देने के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- पारिस्थितिक व्यवधान: इंसानों द्वारा फैलाया गया लाइट पॉल्यूशन और शोर ओलिव रिडले कछुओं के बायोलॉजिकल नेस्टिंग साइकल में बाधा डाल रहा है
- पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: तटीय क्षेत्रों में पर्यटन से होने वाले तत्काल आर्थिक लाभ और दीर्घकालिक जैव विविधता संरक्षण लक्ष्यों के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: इकोटूरिज्म · जैव विविधता संरक्षण · आवास विखंडन · लुप्तप्राय प्रजातियां · सतत विकास
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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