भारत की लिक्विड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी (Liquid Propulsion Technology) के क्षेत्र में अग्रणी डॉ
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चर्चा में क्यों
भारत की लिक्विड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी (Liquid Propulsion Technology) के क्षेत्र में अग्रणी डॉ. ए.ई. मुथुनायगम को विज्ञान और इंजीनियरिंग में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
पृष्ठभूमि
डॉ. ए.ई. मुथुनायगम ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (Liquid Propulsion Systems Centre) के पूर्व निदेशक हैं। उन्होंने अपना करियर 1966 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में अंतरिक्ष कार्यक्रम में शुरू किया था। उन्होंने स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (SSTC) में प्रोपल्शन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिवीजनों के प्रमुख के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदडॉ. ए.ई. मुथुनायगम: ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (Liquid Propulsion Systems Centre) के पूर्व डायरेक्टर।
- विज्ञान-तकनीकलिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के तहत एक प्रमुख केंद्र।
- तथ्यडॉ. मुथुनायगम 1966 में स्पेस प्रोग्राम (space program) में शामिल हुए।
- विज्ञान-तकनीकस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (SSTC): वह डिवीज़न जिसका नेतृत्व मुथुनायगम ने प्रोपल्शन और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए किया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्वदेशी प्रणोदन तकनीक के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- तकनीकी संप्रभुता: हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल्स के लिए विदेशी प्रोपल्शन सिस्टम पर निर्भरता कम करना
- इंस्टीट्यूशनल मेमोरी: हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग सेक्टर में अनुभवी विशेषज्ञता को बनाए रखने का महत्व
मुख्य शब्द: स्वदेशी तकनीक · अंतरिक्ष अन्वेषण · प्रोपल्शन सिस्टम · वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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