कोलकाता हाई कोर्ट ने कोलकाता में बिगड़ती वायु गुणवत्ता (Air Quality) पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए राज्य सरकार को 28 फरवरी तक जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है
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चर्चा में क्यों
कोलकाता हाई कोर्ट ने कोलकाता में बिगड़ती वायु गुणवत्ता (Air Quality) पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए राज्य सरकार को 28 फरवरी तक जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।
पृष्ठभूमि
अदालत अधिवक्ता आकाश शर्मा द्वारा दायर एक PIL पर सुनवाई कर रही है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि खतरनाक वायु गुणवत्ता जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन करती है। बोस इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर अभिजीत चटर्जी ने इस प्रदूषण के लिए प्रदूषकों के बढ़ते संचय, ठंडे मौसम और कचरा जलाने को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानकोलकाता: शहर में Air Quality Index (AQI) बिगड़ रहा है और हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच रही है।
- विज्ञान-तकनीकनाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ग्राउंड-लेवल ओजोन: इन्हें विशेषज्ञ ध्यान देने योग्य जहरीले गैसीय प्रदूषकों (toxic gaseous pollutants) के रूप में पहचाना गया है।
- तथ्य28 फरवरी: कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार के जवाब के लिए तय की गई डेडलाइन।
मेन्स के लिए
प्रश्न: बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण जीवन के अधिकार पर पड़ने वाले संवैधानिक प्रभावों और पर्यावरणीय मानकों को लागू करने में न्यायपालिका की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- जुडिशियल एक्टिविज्म: प्रदूषण नियंत्रण लागू करने के लिए कोर्ट द्वारा तय की गई डेडलाइन और राज्य की प्रशासनिक क्षमता के बीच संतुलन
- सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट: शहरी गलियारों में कचरा जलाने की आदतों और खतरनाक नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के स्तर के बीच संबंध
मुख्य शब्द: सुओ मोटो संज्ञान · जीवन का अधिकार · जनहित याचिका · प्रदूषण का जमाव · न्यायिक निगरानी
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।