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भाग I · स्था. 11.2025 
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तमिलनाडु में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे में बढ़ोतरी

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· भूमि सुधार· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

तमिलनाडु सरकार ने पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) के लिए मुआवजे की दरों में वृद्धि करने का आदेश जारी किया है।

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु सरकार ने वन्यजीवों द्वारा गंभीर चोट लगने पर अधिकतम मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है। फसल के नुकसान की सीमा ₹40,000 प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। साथ ही, पक्के मकानों के लिए मुआवजे को बढ़ाकर ₹1.5 लाख और दुधारू पशुओं के लिए ₹40,000 कर दिया गया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यतमिलनाडु में वन्यजीव संघर्ष (wildlife conflicts) के कारण होने वाली गंभीर मानव चोटों के लिए अधिकतम मुआवजा: ₹5 लाख।
  • तथ्यतमिलनाडु में फसल नुकसान मुआवजे की सीमा: ₹40,000 प्रति एकड़।
  • तथ्यतमिलनाडु में पक्के घरों के लिए मुआवजा: ₹1.5 लाख।
  • तथ्यतमिलनाडु में दुधारू पशुओं के लिए मुआवजा: ₹40,000।
  • संस्थापर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग: तमिलनाडु में मुआवजे के आदेश के लिए जिम्मेदार निकाय।

मेन्स के लिए

प्रश्न: कृषि प्रधान परिदृश्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष के सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए और शमन रणनीति के रूप में मौद्रिक मुआवजे की प्रभावकारिता का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • आर्थिक सुभेद्यता: भारी फसल नुकसान और पशुओं पर हमला छोटे किसानों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है
  • पारिस्थितिक घर्षण: कृषि क्षेत्रों में आवास विखंडन से वन्यजीव-मानव संपर्क में बढ़ोतरी
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: वन्यजीव संरक्षण लक्ष्यों और ग्रामीण आबादी की तत्काल आजीविका सुरक्षा के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: मानव-वन्यजीव संघर्ष · मुआवज़ा तंत्र · आजीविका सुरक्षा · आवास विखंडन · बचाव की रणनीति

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · जैव विविधता एवं संरक्षण

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।