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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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दक्षिण भारत में पिछले 70 सालों में बढ़ी नमी, सूखे इलाके हुए कम

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· फसल पैटर्न एवं सिंचाई· प्रीलिम्स + मेन्स·

चर्चा में क्यों

IMD और IITM पुणे के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट दी है कि पिछले सात दशकों में दक्षिण भारत अधिक आर्द्र (wetter) हो गया है, जिसमें गर्म अर्ध-शुष्क (semi-arid) क्षेत्र लगभग आधे रह गए हैं क्योंकि वे उष्णकटिबंधीय सवाना क्षेत्रों (tropical savannah zones) में बदल गए हैं।

पृष्ठभूमि

MAUSAM जर्नल में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि दक्षिण भारत के गर्म अर्ध-शुष्क (semi-arid) क्षेत्र 30% (1951-1980) से घटकर 16% (1991-2020) रह गए हैं।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाइंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (IITM) ने यह अध्ययन किया।
  • स्थानयह अध्ययन दक्षिण भारत के जलवायु परिवर्तन (Climatic transition) पर केंद्रित है।
  • तथ्यदक्षिण भारत के गर्म अर्ध-शुष्क (semi-arid) क्षेत्रों में 1951-1980 और 1991-2020 की अवधि के बीच 30% से घटकर 16% रह गए।
  • पर्यावरणयह अध्ययन हॉट सेमी-एरिड (hot semi-arid) क्षेत्रों से ट्रॉपिकल सवाना (tropical savannah) ज़ोन्स में बदलाव की पहचान करता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: दक्षिण भारत में बदलती आर्द्रता के स्वरूपों के कारण जलवायु क्षेत्रों में हो रहे बदलावों के आलोक में, पारंपरिक कृषि नियोजन और फसल चयन के पुनरीक्षण की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • कृषि अनुकूलन: ट्रॉपिकल सवाना ज़ोन के लिए क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फसलों की ज़रूरत
  • हाइड्रोलॉजिकल प्लानिंग: अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में नमी के बढ़ते स्तर और बदले हुए बारिश के पैटर्न को मैनेज करना

मुख्य शब्द: जलवायु परिवर्तन · ट्रॉपिकल सवाना · कृषि नियोजन · अर्ध-शुष्क क्षेत्र · नमी के पैटर्न

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।