ट्रेजरी बिल यील्ड्स करीब 2 साल के हाई पर, 35,000 करोड़ की लिक्विडिटी से उतार-चढ़ाव
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मौद्रिक नीति और लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management): यील्ड कर्व वोलाटिलिटी (Yield Curve Volatility) से संबंधित एक महत्वपूर्ण GS3 विषय।
चर्चा में क्यों
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आंकड़ों से पता चला है कि ₹35,000 करोड़ के लिक्विडिटी सरप्लस (liquidity surplus) और तेल की ऊंची कीमतों के कारण ट्रेजरी बिल यील्ड (treasury bill yields) लगभग दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
पृष्ठभूमि
ट्रेजरी बिल की यील्ड (yield) क्रमशः 5.93% (91-दिन), 6.54% (182-दिन) और 6.69% (364-दिन) तक पहुंच गई, जो पिछली नीलामी की तुलना में 20 बेसिस पॉइंट अधिक है। 10-वर्षीय यील्ड 7.44% पर बंद हुई, जबकि 6.94% वाली 2036 की बॉन्ड अपरिवर्तित रही।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्य91-day, 182-day और 364-day ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) की यील्ड (Yield) क्रमशः 5.93%, 6.54% और 6.69% तक पहुंच गई।
- तथ्यअक्टूबर में सिस्टम लिक्विडिटी सरप्लस (System liquidity surplus) ₹2.6 लाख करोड़ रहा, जबकि सितंबर में यह ₹7.8 लाख करोड़ था।
- तथ्य10-year yield 7.44% पर बंद हुई, जबकि 6.94% की 2036 bond yield में कोई बदलाव नहीं हुआ।
- संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ट्रेजरी बिल यील्ड्स (Treasury Bill Yields) की निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार संस्था है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
भारत में ट्रेजरी बिल यील्ड (Treasury bill yields) और लिक्विडिटी (Liquidity) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- अक्टूबर में सिस्टम लिक्विडिटी सरप्लस ₹7.8 लाख करोड़ रहा।
- इस अवधि के दौरान 91-day ट्रेजरी बिल (Treasury Bill) की यील्ड (Yield) 5.93% तक पहुंच गई।
- 10-year yield 6.94% पर बंद हुई, जबकि 2036 बॉन्ड में कोई बदलाव नहीं हुआ।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)केवल 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (b) केवल 2 — कथन 2 सही है। कथन 1 गलत है: अक्टूबर में लिक्विडिटी सरप्लस (liquidity surplus) ₹2.6 लाख करोड़ था। कथन 3 गलत है: 10-year yield 7.44% पर बंद हुई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अल्पकालिक तरलता में होने वाले उतार-चढ़ाव और वैश्विक वस्तु कीमतों के प्रभाव के संदर्भ में भारत में यील्ड कर्व (yield curve) और मौद्रिक नीति संचरण (monetary policy transmission) पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- लिक्विडिटी प्रीमियम: शॉर्ट-टर्म फंडिंग का दबाव ट्रेडर्स को टी-बिल्स पर ज्यादा प्रीमियम मांगने के लिए मजबूर कर रहा है
- महंगाई-ग्रोथ ट्रेड-ऑफ: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आक्रामक पॉलिसी टाइटनिंग और आर्थिक ग्रोथ बनाए रखने के बीच दुविधा पैदा कर रही हैं
- राजकोषीय-मौद्रिक टकराव: बढ़ते राजकोषीय घाटे का मार्केट सेंटीमेंट और रुपये की गिरावट पर असर
मुख्य शब्द: ट्रेजरी बिल · लिक्विडिटी सरप्लस · यील्ड कर्व · मौनेटरी पॉलिसी · महंगाई का दबाव · बेसिस पॉइंट
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।